74 देशों की नौसेना, अचानक पहुंचे बिहार , “बुद्ध म् शरणम् गच्छामि ,धम्म शरणम् गच्छामी “

भारत के रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी ने की स्वागतम् 

गयाजी (बिहार): बोधगया में अचानक 74 देशों के सफेद वर्दीधारी नौसेना अधिकारियों का जमावड़ा देख हर कोई हैरान हो गया। दरअसल, भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित मिलन- 2026′ (MILAN-26) और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) में हिस्सा लेने आए 327 विदेशी मेहमानों के लिए यह एक खास सांस्कृतिक सफर था।

● विशाखापट्टनम के समंदर में शक्ति प्रदर्शन से पहले, ये ‘समुद्री योद्धा’ शांति की तलाश में बुद्ध की शरण में पहुंचे। 20 फरवरी को इन अधिकारियों ने महाबोधि मंदिर में मत्था टेका, जिससे बिहार की धरती से पूरी दुनिया को शांति और भाईचारे का एक कड़ा संदेश गया।

● विशाखापट्टनम से बोधगया का कनेक्शन

भारतीय नौसेना 1995 से हर दो साल में ‘मिलन’ अभ्यास आयोजित करती है। फरवरी 2026 में विशाखापट्टनम में होने वाले इस महा-आयोजन के लिए दुनिया भर की नौसेनाएं जुटी हैं। युद्ध कौशल दिखाने से पहले, भारतीय नौसेना ने इन विदेशी मेहमानों को भारत की ‘आध्यात्मिक शक्ति’ से रूबरू कराने के लिए बोधगया का विशेष दौरा रखा। यह कदम न केवल रक्षा संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गहराई को भी पेश करता है।

● बोधि वृक्ष के नीचे पाया सुकून मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) ने इन नौसैनिकों का स्वागत पारंपरिक ‘खादा’ (पवित्र स्कार्फ) पहनाकर किया। अधिकारियों ने उस पवित्र बोधि वृक्ष के दर्शन किए जिसके नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। डेलिगेशन के सदस्य यह जानकर दंग थे कि कैसे वैज्ञानिक तरीके से इस प्राचीन पेड़ की देखभाल की जाती है। इन जांबाज सैनिकों ने कुछ समय ध्यान (Meditation) लगाया और बुद्ध के उपदेशों को सुना, जो उनके तनावपूर्ण और साहसिक जीवन के बीच शांति का एक अनूठा अनुभव था।

● बोधि वृक्ष के नीचे पाया सुकून मंदिर प्रबंधन समिति (BTMC) ने इन नौसैनिकों का स्वागत पारंपरिक ‘खादा’ (पवित्र स्कार्फ) पहनाकर किया। अधिकारियों ने उस पवित्र बोधि वृक्ष के दर्शन किए जिसके नीचे भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। डेलिगेशन के सदस्य यह जानकर दंग थे कि कैसे वैज्ञानिक तरीके से इस प्राचीन पेड़ की देखभाल की जाती है। इन जांबाज सैनिकों ने कुछ समय ध्यान (Meditation) लगाया और बुद्ध के उपदेशों को सुना, जो उनके तनावपूर्ण और साहसिक जीवन के बीच शांति का एक अनूठा अनुभव था।

●74 देशों के योद्धाओं का जमावड़ा यह नजारा अद्भुत था, एक साथ 74 देशों के झंडे और उनके प्रतिनिधि बिहार की गलियों में थे। मंदिर के मुख्य भिक्षु भिक्षु चालिंदा और अन्य सदस्यों ने उन्हें मंदिर के इतिहास और स्थापत्य कला के बारे में विस्तार से बताया।

● डेलिगेशन ने मंदिर परिसर के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया। यह दौरा महज एक पर्यटन नहीं था, बल्कि दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए नौसैनिकों के लिए भारत की ‘अतिथि देवो भव:’ परंपरा को करीब से महसूस करने का मौका था।

● समंदर के रक्षकों का शांति संदेश

दौरे के अंत में विदेशी अधिकारियों ने अपने अनुभव को ‘आध्यात्मिक और यादगार’ बताया। उनका कहना था कि बुद्ध की धरती पर आकर उन्हें अहसास हुआ कि शक्ति के साथ शांति और करुणा का होना कितना जरूरी है। डेलिगेशन में शामिल अधिकारियों ने माना कि वे अपने साथ केवल भारत की यादें ही नहीं, बल्कि यहां से ‘सह-अस्तित्व’ का गहरा सबक लेकर लौट रहे हैं। बिहार के बोधगया से निकला यह शांति का संदेश अब 74 देशों के समुद्री तटों तक पहुंचेगा।

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