बिहार में अनुकम्पा वाले नेताओं की अहम भूमिका
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्णय पर टिका हैं, जननायक कर्पूरी युग का अंत और मनुस्मृति युग की शुरुआत ( श्री लालू प्रसाद यादव कभी झूके नहीं , The Great Hero of Bihar, shri Lalu Prasad Yadav )
” हम अनुसूचित पिछङों को गुलाम हीं रहने दिजिए, मेरे वोट के किमत के रूप में खैरात अनाज और रूपए तो मिलते हैं, शारीरिक गुलामी और मानसिक गुलामी हीं अच्छा है ” ( कर्पूरी युग का अंत तो नहीं ,अनुकम्पा वाले नेताओं की अहम भूमिका)
बिहार (भारत): बिहार के मुख्यमन्त्री श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व को बीस साल हो चुके है, अनुसूचित पिछङावर्ग जय श्री राम और जय भीम के जयकारा लगाने में मग्न है, इथर अनुसूचित पिछङावर्ग के अनुकम्पा वाले नेतृत्वकर्ता अजगर बन कर अनुच्छेद 330 एवं अनुच्छेद 340 को धीरे धीरे आधा निगलकर सांस ले रहें हैं । भारतीय संविधान के आरक्षण से अनुसूचित पिछङावर्ग को क्या लाभ है, लाभ मात्र इतना है कि बैकवर्ड के हीं फार्वार्ड, बिहार के लगभग बारह करोङ जनसंख्या में से 1200 बारह सौ परिवार हीं व्याकरणयुक्त संविधान का पूर्ण लाभ प्राप्त कर अघाकर तीन किलोमीटर लम्बा उदर निकाल कर बैठे हुए है, यदि मनुवादियों की मानी जाए तो मात्र लगभग 9% हीं व्याकरणयुक्त जनसंख्या वाला व्यक्ति 91% पर भारी कैसे हो सकता है, सम्भव हीं नहीं हैं। बैकवर्ड के फर्वार्ड हीं अनुसूचित पिछङावर्ग को फिर से गुलाम बना लिए हैं, झूठे मनुवादियों पर आरोप लगा रहें है कि सवर्ण अत्याचार कर रहा है। अब अनुसूचित पिछङावर्ग के जयकारा करने वाले 85% चुटपुजियां नेताओं को राजनैतिक अलजबरा गणित पढने की जरूरत है, अब जय श्रीराम, जय भीम की जयकारा नहीं करने की जरूरत है, बल्कि अब अपने हीं अनुकम्पा वाले नेतृत्वकर्ता को सचेत होने की आवश्यकता है , यदि सचेत नहीं होते हैं तो, सबक सिखाने की जरूरत है । अनुकम्पा वाले नेतृत्वकर्ताओ की सूचि निम्नलिखित है:-
1. भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी पुत्र श्री रामनाथ ठाकुर जी जो सेन ,सविता, नाई- हजाम, श्रीवास, ठाकुर यानि कि नाई समुदाय से एक भी नेता को मजबूत नहीं किये जो भविष्य के नाई समुदाय के बुनियाद को मजबूत करता रहे, ये भी अनुसूचित पिछङावर्ग फार्वार्ड हीं हैं, ये नाईयों से मुलाकात करने में घृणा मानते हैं।
2 . बिहार के रियल हिरो श्री लालू प्रसाद यादव के पुत्र एवं राजनैतिक उतराधिकारीं श्री तेजस्वी प्रसाद यादव भी अनुकम्पा वाले नेतृत्वकर्ता हैं, इनका सत्ताविहिन होना, एक हीं व्याकरणयुक्त कारण है, अनुसूचित पिछङावर्ग को साथ-साथ रखकर यादवशाहीं युग की शुरुआत करना इनके लिए महंगा पङ गया । यदि तेजस्वी जी अनुसूचित पिछङावर्ग के लिए मल्टीप्लेक्स नेतृत्व विकसित किये रहते तो लालूयुग का अंत कतई संभव नहीं था , श्री लालू प्रसाद यादव जी को सतारूढ दल के द्वारा यातना के देने के बावजूद झूके नहीं, अभी भी सम्भलने की जरूरत है।
3. श्री राम विलास पासवान जी के पुत्र अभिनेता चिराग पासवान जी भी अनुकम्पा के आधार पर हीं व्याकरणयुक्त नेतृत्वकर्ता हैं, चिराग जी अनुसूचित पिछङावर्ग के नेतृत्वकर्ता निर्माण पर विश्वास नहीं करते और न रखते हैं , यें आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी के हनुमान जी है।
4. श्री नीतीश कुमार बिहार के विकास पुरुष एवं दसवीं बार मुख्यमन्त्री की शपथ लेने वाले विश्व के प्रथम नेता है, इनके पुत्र निशांत कुमार हैं जो नीतीश जी के बागडोर सम्भालने हेतु राजनैतिक पथ पर अग्रसर है। निशांत कुमार भी अनुकम्पा के हीं नेता है । यदि श्री नीतीश कुमार राज्य सभा से त्यागपत्र देकर मुख्यमन्त्री बने रहते हैं तो अच्छा है।
बिहार राज्य का 1970 के बाद भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री काल से 1989 तक सवर्ण राजनैतिक बुनियाद हिला और कर्पूरी फार्मूला का उदय होना हीं तो श्री लालू प्रसाद यादव जी को 1990 में बिहार का शासन एवं बागडोर प्राप्त हुआ। पांच वर्ष तक लालू सरकार अनुसूचित पिछङावर्ग के लिए पुरजोर कार्य कर गरीबों के मसीहा बने, गरीबों के आवाज बन गए, मुकबधिर समुदायों के लोगों में बोलने की हिम्मत आई लालू यादव जिन्दाबाद के नारे लगे, लालू सरकार में सवर्ण का प्रवेश हुआ, धीरे धीरे लालू सरकार पतन की ओर बढी, अटल जी के नेतृत्व वाली नीतीश कुमार का उदय हुआ, 2005 में श्री नीतीश कुमार बिहार राज्य के मुख्यमंत्री बने, राजनैतिक योगासन चलता रहा, अल्पमत में होने के बावजूद श्री नीतीश कुमार हीं लगातार मुख्यमंत्री बनते रहे 2026 में भी मुख्यमंत्री बने। केंद्रीय सरकार से लेकर बिहार सरकार तक अनुसूचित पिछङावर्ग की हीं सरकार हैं। लेकिन श्री नीतीश कुमार जी की राजनैतिक फैसला हीं अनुसूचित पिछङावर्ग के भविष्य को सुधार सकता है या पुन: मुसिको भव: बना सकता है, बिहार में सभी अनुसूचित पिछङावर्ग के रियल हिरों राजनैतिक नेतृत्वकर्ता अनुकम्पा के नेतृत्वकर्ता उत्पन्न कर लिए हैं अब लोकतंत्र बनाम अनुकम्पा तंत्र की सरकार चलेगी। अब समतामूलक समाज निर्माण की बात करना बेमानी होगी।
राजनैतिक अनुकम्पा युग की शुरुआत हो चुकी है, भारत गणराज्य की वैज्ञानिक प्रतिभायें घुटन घूंट कर मरेंगे, वैज्ञानिक युग निर्माण की बात सिर्फ कहने के लिए हीं होगा, भारतीय वैज्ञानिक प्रतिभा, विधा, कौशल सभी अपने जीवन यापन के लिए पश्चिम देशों में पलायन कर जायेंगें, अनुसूचित पिछङावर्ग ,आर्थिक और सामाजिक न्याय के लिए आहे भरॅगे, मानसिक गुलामी, अभिशाप बनेगा, पेट भरने एवं फैशन के लिए अनुसूचित पिछङावर्ग के लोग मानसिक, शारीरिक, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने हेतु शारीरिक शोषण के लिए तो जरूर तैयार हो जायेंगे, जमींदारी और पुंजिवादी व्यवस्था प्रभावी होगा। संभलने की जरूरत है।
अब कम से कम मेरा बात मानिये- ” वैज्ञानिक धम्म अपनाईये, वैज्ञानिक भारत बनाइए।
डाॅ बासुदेव कुमार शर्मा
प्रधान संपादक (वैज्ञानिक)
विज्ञानमेव जयते PRGI भारत सरकार.
