जैन धम्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की 2624वीं जयंति/अवतरण दिवस
भारत/BHARAT: वर्ष 2026 में भगवान महावीर जयंती 31 मार्च, मंगलवार को मनाई जाएग
गई । यह जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की 2624वीं जन्म जयंती समारोह मनाईगई । यह पर्व मुख्य रूप से अहिंसा, शांति और प्रेम का संदेश देता है, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाता है।
महावीर जयंती 2026 के प्रमुख तथ्य:
तिथि: 31 मार्च 2026
■ महत्व: यह जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान महावीर के जन्म का उत्सव है।
■ उत्सव: इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक और भगवान महावीर की मूर्तियों के साथ शोभायात्रा (जुलूस) निकाली जाती है।
■ शिक्षाएं: महावीर स्वामी ने अहिंसा (Non- violence), सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (अनासक्ति) के सिद्धांत दिए।
■ अवकाश: इस दिन भारत में कई जगहों पर सरकारी अवकाश रहता है। यह दिन दान-पुण्य और आत्म-चिंतन के लिए भी बहुत पवित्र माना जाता है।
क्रमांक तीर्थंकर चित्र स्वर्ग (पूर्व जन्म) जन्मस्थान;
अभिषेक
माता-पिता वर्ण
चिह्न
लम्बाई
आयु
वृक्ष
परिचर
आत्माएं
पुरुष शिष्य;
स्त्री शिष्य
निर्वाण स्थल जन्म
■ 1 ऋषभदेव:- सर्वर्थासिद्ध अयोध्या; कैलास मरुदेवी से नाभि सुनहरा वृषभ 1,500 मीटर 59.2704 महाशंख वर्ष वट (फ़िकस बेंघालेंसिस) गोमुख और चक्रेश्वरी पुण्डरिक; ब्राह्मी अष्टापद 10224 वर्ष पूर्व
■ 2 अजितनाथ :- विजयाविमन अयोध्या;
शिखरजी विजया से जितशत्रु सुनहरा हाथी 1,350 मीटर 50.8032 महाशंख वर्ष साल (शोरिया रोबस्टा) महायक्ष और अजीतबाल; अथवा रोहिणी सिंहसेन; फलगु शिखरजी 5 x 10223 वर्ष पूर्व
■ 3 संभवनाथ :- उवारिमाग्रैवेक श्रावस्ती;
शिखरजी सेना से जितारी सुनहरा घोड़ा 1,200 मीटर 42.336 महाशंख वर्ष चिरौंजी (बुचानानिया लेटिफोलिया) त्रिमुखा और दुरितारी; अथवा प्रजंपति चारु; श्यामा शिखरजी 2 x 10223 वर्ष पूर्व
■ 4 अभिनंदननाथ :- जयंताविमन अयोध्या;
शिखरजी सिद्धार्थ से सम्वर सुनहरा बन्दर 1,050 मीटर 35.28 महाशंख वर्ष कँगनी (सेतिरिया इटालिका, कभी कभी पानीकुम इतालिकुम के नाम से भी जाना जाता है) नायक और कालिका; या यक्षेश्वर और वज्र शृंखला वज्रनाभ; अजिता शिखरजी 10223 वर्ष पूर्व
■ 5 सुमतिनाथ :- जयंता विमन अयोध्या; शिखरजी मंगल से मेघरथ सुनहरा बत्तख 900 मीटर 28.224 महाशंख वर्ष साल (शोरिया रोबस्टा) तुम्बुरु और महाकाली; या पुरुषदत्त चरम; कश्यपी शिखरजी 10222 वर्ष पूर्व
■ 6 पद्मप्रभ:- उवरिमग्रैवेक कौशाम्बी; शिखरजी सुशिमा से श्रीधर लाल कमल 750 मीटर 21.168 महाशंख वर्ष छत्र कुसुमा और श्यामा; या मनोवेगा या मनोगुप्ति प्रद्योतन; रति शिखरजी 10221 वर्ष पूर्व
■ 7 सुपार्श्वनाथ :- मध्यमाग्रैवेक वाराणसी; शिखरजी पृथ्वी से सुप्रतिष्ठ सुनहरा स्वस्तिक 600 मीटर 14.112 महाशंख वर्ष शिरीष (अल्बिजिया लेब्बेक) मतंगा और शांता; या वारनंदी और काली विदर्भ; सोमा शिखरजी 10220 वर्ष पूर्व
■ 8 चन्द्रप्रभ :- विजयंत देव लोक चंद्रावती या चन्द्रपुर; सम्मेद शिखरजी लक्ष्मण से महासेन श्वेत वर्धमान चाँद 450 मीटर 705.6 शंख वर्ष नाग विजय और भृकुटि; या श्याम या विजय और ज्वालामालिनी डिन्ना; सुमन शिखरजी 10219 वर्ष पूर्व
■ 9 सुविधिनाथ :- अनन्तदेवलोक ककंडी;
शिखरजी राम से सुग्रीव श्वेत मगरमच्छ 300 मीटर 141.12 शंख वर्ष शाल
(शोरिया रोबस्टा) अजित और सुतरक; या महाकाली वरहक; वरुणी शिखरजी 10218 वर्ष पूर्व
■ 10 शीतलनाथ:- अच्युतदेवलोक भद्दिलापुर;
शिखरजी नन्द से दृधरथ सुनहरा कल्पवृक्ष 270 मीटर 70.56 शंख वर्ष प्रियंगु (सेटेरिया इटालिका, उर्फ पानीकुम इतालिकुम) ब्रह्म और अशोक; या मानवी नन्द; सुयशा शिखरजी 10217 वर्ष पूर्व
■ 11 श्रेयांसनाथ :- अच्युतदेवलोक सिंहपुरी;
शिखरजी विष्णु से विष्णुराज सुनहरा गैंडा 240 मीटर 84 लाख वर्ष तांडुका यक्षेता और
मानवी; या इश्वर और गौरी कश्यप धरणी शिखरजी 10212 वर्ष पूर्व
■ 12 वासुपूज्य :- प्रणतदेवलोक चम्पापुरी;
चम्पापुरी जय से वसुपुज्य लाल भैंसा 210 मीटर 72 लाख वर्ष पताला (बिग्नोनिया सुवेओलेंस) कुमार और चन्द्र; या गंधारी सुभुमा; धरणी चम्पापुरी 4 x 10211 वर्ष पूर्व
■ 13 विमलनाथ:- महासरदेवलोक काम्पिल्यपुर; शिखरजी श्याम से कृतवर्मा सुनहरा शूकर 180 मीटर 60 लाख वर्ष जामुन (यूजेनिया जम्बोलाना) शँउख और विदिता; या वैरोती) मंदार; धारा शिखरजी 1.6 x 10211 वर्ष पूर्व
■ 14 अनन्तनाथ :- प्रणतदेवलोक अयोध्या;
शिखरजी सुयश से सिंहसेन सुनहरा साही 150 मीटर 30 लाख वर्ष अशोक (साराका असोका) पटल और अंकुश; या अनन्तमाटी यश; पद्मा शिखरजी 7 x 10210 वर्ष पूर्व
■ 15 धर्मनाथ :- विजयविमान रत्नापुरी शिखरजी सुवरत से भानु सुनहरा वज्र 135 मीटर 10 लाख वर्ष अपराजिता (क्लिटोरिया टर्नेटिया) किन्नर और कंडरपा; या मानसी अरिष्टा; अर्थशिवा सम्मेद शिखरजी 3 x 10210 वर्ष पूर्व
■ 16 शांतिनाथ:- सर्वार्थसिद्ध गजपुरा या हस्तिनापुर;
शिखरजी अचिरा विश्वसेन सुनहरा हिरन 120 मीटर 100,000 वर्ष नन्दी (सेड्रेला टूना) गरुड और निर्वानी; या किमपुरुष और महामानसी चक्रयुद्ध; शुचीशिखरजी 10194 वर्ष पूर्व
■ 17 कुन्थुनाथ:- सर्वार्थसिद्ध गजपुरा या हस्तिनापुर;
शिखरजी श्रीदेवी से सुराज सुनहरा बकरा 105 मीटर 95,000 वर्ष वट (फ़िकस बेंघालेंसिस) गंधर्व और बाला; या विजयण सम्बा;दामिनी सम्मेद शिखरजी 10194 वर्ष पूर्व
■ 18 अरनाथ :- सर्वार्थसिद्ध गजपुरा या हस्तिनापुर;
शिखरजी देवी से सुदर्शन सुनहरा मछली 90 मीटर 84,000 वर्ष आम (मैंगीफेरा इंडिका) यक्षेता और धन; या केन्द्र और अजीत कुम्भ; रक्षिता शिखरजी 16,585,000 ईसा पूर्व
■ 19 मल्लिनाथ :- जयंतदेवलोक मिथिला;
शिखरजी प्रभावती से कुम्भराज नीला कलश 75 मीटर 55,000 वर्ष अशोक
(साराका असोका) कुबेर और धरणप्रिया; या अपराजिता अभिशाक; बंधुमति शिखरजी 6,584,980 ईसा पूर्व
■ 20 मुनिसुव्रतनाथ :- अपराजितदेवलोक राजगीर; शिखरजी पद्मावति से सुमित्राराज श्याम कछुआ 60 मीटर 30,000 वर्ष चम्पक
(मैगनोलिया चम्पाका)
वरुण और नरदत्त; या बहुरुपिनी मल्लि;पुष्पवती शिखरजी 1,184,980 ईसा पूर्व
■ 21 नमिनाथ :- प्रणतदेवलोक मिथिला;
सम्मेद शिखरजी वाप्रा से विजयराज सुनहरा नीला जल लिली 45 मीटर 10,000 वर्ष बकुल
(मिमुसोप्स एलेंगी)
भृकुटि और गंधारी; या चमुंडी, शुभ; अनिलाशिखरजी 584,979 ईसा पूर्व
■ 22 नेमिनाथ :- अपराजितदेवलोक शौरीपुर;गिरनार शिवदेवी से समुद्रविजय श्याम शंख 30 मीटर 1,000 वर्ष वेतासा (सैलिक्स कैप्रिया लिन) गोमेध और
अम्बिका; या सर्वहण और कुशमंदीनी वरदत्त यक्षदिन्ना गिरनार 84,000 वर्ष पूर्व
■ 23 पार्श्वनाथ :- प्रणतदेवलोक वाराणसी;
सम्मेद शिखरजी वामदेवी से अश्वसेन हरा साँप 13.5 फुट 100 वर्ष गुल धावी (वुडफोर्डिया फ्रुटिकोसा) पर्शवयक्ष या धरणेन्द्र और पदमावती आर्यदिन्ना, पुष्पचुडा शिखरजी 872 ईसा पूर्व
■ 24 भगवान महावीर :- प्रणतदेवलोक क्षत्रियकुंड:- पावापुरी त्रिशला और सिद्धार्थराजा सुनहरा शेर 6 फुट 72 वर्ष सागौन (टेक्टोना ग्रैंडिस) मतंगा और सिद्धायिका
इन्द्रभुति:- चन्दनबाला
पावापुरी 599 ईसा पूर्व
सभी 24 तीर्थंकरों की कुल आयु 2.603672 षष्टिलियन वर्ष के बराबर होती है।
“”” भगवान महावीर के मुख्य उद्देश्य अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह (अनासक्ति), अस्तेय (अचौर्य) और ब्रह्मचर्य के माध्यम से मानवता का कल्याण करना””” । उन्होंने ‘जियो और जीने दो’ का संदेश दिया, जीवमात्र के प्रति करुणा, आत्म-संयम, और समानता का पाठ पढ़ाकर समाज में शांति और नैतिकता स्थापित करने का प्रयास किया।
●●●●●●●●●●●●●●●●
श्री भगवान महावीर के प्रमुख उद्देश्य और सिद्धांत:
■ अहिंसा परमो धर्म: महावीर स्वामी ने मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न पहुँचाने (अहिंसा) को सर्वोच्च धर्म बताया।
■ आत्म-संयम: इंद्रियों और क्रोध, लालच, मोह जैसी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना, जिसे वे सच्चा सुख और सफलता मानते थे।
■ जियो और जीने दो (Parasparopagraho Jivanam): प्रत्येक जीव के प्रति समानता और प्रेम का व्यवहार, यह शिक्षा देना कि सभी जीव जीने के हकदार हैं।
■ अपरिग्रह (अनासक्ति): भौतिक वस्तुओं के प्रति मोह को कम करना और अनावश्यक संग्रह न करना।
■ सत्य और सदाचार: हमेशा सच बोलना और नैतिक जीवन व्यतीत करना।
■ अनेकांतवाद: विचारों की बहुआयामीता और दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करना।
■ समता का संदेश: जाति-भेद और लैंगिक भेदभाव को मिटाकर सभी को समानता का अधिकार देना। इन सिद्धांतों का उद्देश्य मनुष्य को कर्म के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष या निर्वाण (सच्ची शांति) की प्राप्ति की ओर ले जाना था।
(जैन धम्म, जैन धर्म)
31/MARCH/2026
====================
