विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) प्रत्येक वर्ष 22 अप्रैल और पृथ्वी की जैव विविधताएं
उद्देश्य:- पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और पृथ्वी को बचाने के लिए मानव को प्रेरित करना है।
{{ 2026 की थीम: “OUR POWER, OUR PLANET ” (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह)}}
●●विश्व पृथ्वी महोत्सव अप्रैल ( प्रत्येक वर्ष 22 अपैल )●●
■ उद्देश्य: जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा
■ पृथ्वी दिवस मनाने के मुख्य कारण:
पर्यावरण जागरूकता: ग्लोबल वार्मिंग, प्लास्टिक प्रदूषण, और वनों की कटाई जैसे खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाना।
■ संरक्षण के लिए समर्थन: पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए समर्थन प्रदर्शित करना।
सामूहिक कार्रवाई: लोगों को पेड़ लगाने, ऊर्जा बचाने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने जैसे सकारात्मक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना।
पृथ्वी दिवस की शुरुआत अमेरिकी सीनेटर गैलॉर्ड नेल्सन ने 22 अप्रैल 1970 को की थी। इसे पर्यावरण शिक्षा के रूप में शुरू किया गया था, जो अब 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है।
■ ग्लोबल वार्मिग:- ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) मानवीय गतिविधियों के कारण पृथ्वी के वायुमंडल और महासागरों के औसत तापमान में होने वाली दीर्घकालिक वृद्धि है। यह मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) को जलाने और वनों की कटाई से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन) के कारण होती है। इसके परिणामस्वरूप ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र का स्तर बढ़ रहा है और मौसम के मिजाज में विनाशकारी बदलाव (सूखा, बाढ़) आ रहे हैं।
■ ग्लोबल वार्मिंग के मुख्य पहलू क्या है?
ANSWER:- यह पृथ्वी की सतह के निकट औसत तापमान में लगातार बढ़ोतरी की घटना है, जो पिछले 1-2 शताब्दियों में तेज हुई है।
■ कारण: (Causes):
जीवाश्म ईंधन का दहन: उद्योग और वाहनों में कोयला और तेल का उपयोग।
■ वनों की कटाई (Deforestation): पेड़
सोखते हैं, उनकी कमी से गर्मी बढ़ती है।
■ औद्योगिक गतिविधियां: क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसी गैसों का उत्सर्जन।
■ प्रभाव (Effects):
ग्लेशियर और बर्फ का पिघलना: इससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है।
■ अत्यधिक मौसम: भीषण गर्मी, सूखा, और भारी बाढ़ जैसी घटनाएं।
■ पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा: प्रजातियों के विलुप्त होने का जोखिम।
■ समाधान (Solutions): नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) का उपयोग बढ़ाना, वृक्षारोपण करना, और ऊर्जा की खपत कम करना प्रमुख उपाय हैं।
■■ अनुक्रमणिका
■ ग्लोबल वार्मिंग क्या है?:- इसके कारणों और प्रक्रियाओं की सरल भाषा में व्याख्या!
वैश्विक तापक्रम वृद्धि के प्रमुख कारण और क्रियाविधियाँ
वैश्विक तापक्रम की वर्तमान स्थिति
पर्यावरण पर वैश्विक तापवृद्धि का प्रभाव
समुद्र तल से वृद्धि
पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन ,जलवायु परिवर्तन, आपदाओं में वृद्धि फसलों और पशुधन उद्योग को नुकसान
मानव शरीर पर प्रभाव
जापान पर प्रभाव
वैश्विक तापक्रम के लिए भविष्य की पहलें
ऊर्जा संरक्षण उपाय
नवीकरणीय ऊर्जा
हाइड्रोजन उपयोग, ईवी/एफसीवी का परिचय
सीसीएस वैश्विक तापक्रम को रोकने के लिए हम क्या कर सकते हैं
■ मानव शरीर पर प्रभाव
ग्लोबल वार्मिंग के कारण पारिस्थितिकी तंत्र में होने वाले बदलाव संक्रामक रोगों के प्रसार का कारण भी बन सकते हैं।
■ जापान पर प्रभाव:-
जापान में भी कई तरह के प्रभावों की आशंका जताई जा रही है। जापान के तटीय इलाकों में समुद्र स्तर परिवर्तन के दीर्घकालिक रुझान पर जापान सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, समुद्र स्तर पहले ही प्रति वर्ष 3.3 मिलीमीटर बढ़ चुका है। उदाहरण के लिए, यदि जल स्तर में वृद्धि जारी रहती है और समुद्र स्तर 1 मीटर बढ़ जाता है, तो अनुमान है कि जापान के 90% से अधिक रेतीले समुद्र तट नष्ट हो जाएंगे । इसके अलावा, यह भी आशंका है कि सुनामी और तूफानों से प्रभावित होने वाले जापान को असामान्य मौसम के कारण और भी अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
■ भूमंडलीय तापक्रम में वृद्धि क्या है?
ANSWER:- तापक्रमण पृथ्वी की सतह के निकट तापमान में क्रमिक वृद्धि की घटना है। यह घटना पिछले एक-दो शताब्दियों से देखी जा रही है। इस परिवर्तन ने पृथ्वी के जलवायु पैटर्न को बाधित किया है। हालांकि वैश्विक तापक्रमण की अवधारणा काफी विवादास्पद है, फिर भी वैज्ञानिकों ने इस तथ्य के समर्थन में प्रासंगिक आंकड़े प्रस्तुत किए हैं कि पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। वैश्विक तापमान वृद्धि के कई कारण हैं, जिनका मनुष्यों, पौधों और जानवरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ये कारण प्राकृतिक हो सकते हैं या मानवीय गतिविधियों का परिणाम हो सकते हैं। इन समस्याओं को कम करने के लिए वैश्विक तापमान वृद्धि के नकारात्मक प्रभावों को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
■ वैश्विक तापक्रम वृद्धि के मानव निर्मित कारण
● वनों की कटाई
पौधे ऑक्सीजन के मुख्य स्रोत हैं। वे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बना रहता है। घरेलू और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए वनों का अंधाधुंध दोहन हो रहा है। इससे पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में वृद्धि हो रही है।
● वाहनों का उपयोग
वाहनों का उपयोग, चाहे कितनी भी कम दूरी के लिए हो, विभिन्न प्रकार के गैसीय उत्सर्जन का कारण बनता है। वाहन जीवाश्म ईंधन जलाते हैं जो वायुमंडल में बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य विषैले पदार्थ उत्सर्जित करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप तापमान में वृद्धि होती है।
● क्लोरोफ्लोरोकार्बन
एयर कंडीशनर और रेफ्रिजरेटर के अत्यधिक उपयोग से मनुष्य पर्यावरण में सीएफसी (कार्बन डाइऑक्साइड कार्बन डाइऑक्साइड) की मात्रा बढ़ा रहे हैं, जिससे वायुमंडलीय ओजोन परत प्रभावित हो रही है। ओजोन परत पृथ्वी की सतह को सूर्य से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है। सीएफसी के कारण ओजोन परत में कमी आई है, जिससे पराबैंगनी किरणों का प्रवेश मार्ग प्रशस्त हो गया है और परिणामस्वरूप पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है।
● औद्योगिक विकास
औद्योगीकरण के आगमन के साथ, पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कारखानों से निकलने वाले हानिकारक उत्सर्जन पृथ्वी के बढ़ते तापमान में और भी योगदान देते हैं, 2013 में, जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल ने बताया कि 1880 और 2012 के बीच वैश्विक तापमान में 0.9 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई है। औद्योगिक क्रांति से पहले के औसत तापमान की तुलना में यह वृद्धि 1.1 डिग्री सेल्सियस है।
● कृषि:- विभिन्न कृषि गतिविधियों से कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन गैस उत्पन्न होती है। ये वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ाती हैं और पृथ्वी का तापमान बढ़ाती हैं।
●जनसंख्या:- जनसंख्या में वृद्धि का मतलब है अधिक लोगों का सांस लेना। इससे वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ जाता है, जो वैश्विक तापवृद्धि का मुख्य कारण है।
● वैश्विक तापक्रम वृद्धि के प्राकृतिक कारण:- ज्वालामुखी
ज्वालामुखी वैश्विक तापमान वृद्धि में योगदान देने वाले सबसे बड़े प्राकृतिक कारकों में से एक हैं। ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान निकलने वाली राख और धुआं वायुमंडल में फैलकर जलवायु को प्रभावित करता है।
● जल वाष्प:- जल वाष्प एक प्रकार की ग्रीनहाउस गैस है। पृथ्वी के तापमान में वृद्धि के कारण, जल निकायों से अधिक पानी वाष्पीकृत होकर वायुमंडल में रह जाता है, जिससे वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है।
● पिघलती पर्माफ्रॉस्ट:-
पर्माफ्रॉस्ट जमी हुई मिट्टी होती है जिसमें कई वर्षों तक पर्यावरणीय गैसें फंसी रहती हैं और यह पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद होती है। यह ग्लेशियरों में पाई जाती है। पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से ये गैसें वापस वायुमंडल में चली जाती हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ जाता है।
● वन ज्वाला:- वनों में लगने वाली भीषण आग से भारी मात्रा में कार्बन युक्त धुआं निकलता है। ये गैसें वायुमंडल में फैलकर पृथ्वी का तापमान बढकर अति भयानक रूप ले लेगा जिससे मानवीय नस्लों में भारी परिवर्तन, महिला पुरूष 12-15 वर्ष के बिच हीं प्रजनन करने लगेंगे, शिशु का मृत्यु दर बढ जायगा, मानवीय नस्ल की उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन प्रजातियाँ 25-39% तक समाप्त हो जायेंगे। उन्नत हाइब्रिड मानसिकता की मानवों की कमी के कारण प्राकृतिक वातावरण को सौंदर्यीकरण करने की प्रक्रियाओं में कमी कमीं होंगे, थलचर, जलचर, नभचर के जीव जन्तुओं की जनससंख्या भारी कमी हो जायेंगे, जल के बिना जीवन मुस्कुराना बन्द करने लगेगा, जल स्त्रोतों की सभी संसाधन मृतप्राय हो जायेंगें। अब मानव को हीं ग्लोबल वार्मिग से सबसे अधिक खतरा है। मानव एवं मानवीय तंत्र को सुधरनें एवं सुधारने की जरूरत है।
[डाॅ बासुदेव कुमार शर्मा]प्रधान संपादक/ वैज्ञानिक
विज्ञानमेव जयते PRGI भारत सरकार
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