विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस 23 अप्रैल
यूनेस्को/UNESCO [ UNITED NATION EDUCATION SCIENTIFIC CULTURAL ORGANIZATION ] :- प्रत्येक वर्ष 23 अप्रैल को विश्व पुस्तक और कापीराइट दिवस मनाया जाता है, किताबों के पढ़ने, लिखने, प्रकाशन और कॉपीराइट (लेखकों की बौद्धिक संपदा अधिकार ) के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रमुख वैश्विक आयोजन है। यूनेस्को (UNESCO) ने 1995 में इस दिन की शुरुआत की थी, जो पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने और लेखकों के अधिकारों का सम्मान करने का संदेश देता है।
मुख्य विवरण:
उद्देश्य: पठन-पाठन, प्रकाशन को बढ़ावा देना और कॉपीराइट के माध्यम से लेखकों की बौद्धिक संपदा की रक्षा करना।
महत्व: यह दिन संस्कृति, ज्ञान और विचारों को साझा करने का प्रतीक है। यह पीढ़ियों के बीच सेतु का कार्य करता है।
इतिहास: यह तिथि महान लेखकों विलियम शेक्सपियर और मिगुएल सेर्वेंट्स की मृत्यु और जन्म वर्षगांठ (1616) से जुड़ी है।
आयोजन: 100 से अधिक देशों में यूनेस्को द्वारा समर्थित इस दिवस पर पुस्तक मेलों और पठन कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि किताबें ज्ञान का सबसे शक्तिशाली माध्यम हैं जो हमारी सोच को नई दिशा देती हैं।
■यूनेस्को के सदस्य देशों जुलाई 2023 तक [अपडेट] , यूनेस्को के सदस्यों में 194 सदस्य राज्य और 12 सहयोगी सदस्य शामिल हैं।
यूनेस्को (UNESCO – United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष संस्था है, जो शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से विश्व में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देती है। इसका मुख्यालय पेरिस, फ्रांस में स्थित है और इसकी स्थापना 16 नवंबर 1945 को हुई थी। यह संस्था दुनिया भर में सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों को संरक्षित करने के लिए ‘विश्व धरोहर स्थल’ (World Heritage Sites) की सूची भी जारी करती है।
यूनेस्को के मुख्य कार्य और उद्देश्य:
शिक्षा: सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देना।
सांस्कृतिक विरासत: ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों और सांस्कृतिक विविधता का संरक्षण करना।
विज्ञान: सतत विकास के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान और नीति को बढ़ावा देना।
ज्ञान: संचार और सूचना के माध्यम से समावेशी समाज का निर्माण करना।
महत्वपूर्ण जानकारी:
स्थापना: 16 नवंबर 1945।
■ मुख्यालय: पेरिस, फ्रांस। भारत: भारत 1946 से यूनेस्को का सदस्य देश है।
● कार्य: विश्व धरोहर स्थलों (World Heritage Sites) का चयन और संरक्षण करना। यूनेस्को का मानना है कि शांति केवल राजनीतिक या आर्थिक समझौतों से नहीं, बल्कि मानवता के बौद्धिक और नैतिक सहयोग से ही स्थापित की जा सकती है।
■ प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम 1867 (PRB Act) एक ब्रिटिशकालीन कानून है, जो भारत में मुद्रणालय (Printing Presses), समाचार पत्रों और पुस्तकों के पंजीकरण, नियमन और उनके संरक्षण को नियंत्रित करता है। यह प्रकाशकों को हर प्रकाशित सामग्री की प्रति जमा करने के लिए बाध्य करता है और प्रकाशन पर प्रिंटर/प्रकाशक का विवरण अनिवार्य बनाता है।
■ अधिनियम के मुख्य उद्देश्य और विशेषताएँ:
प्रकाशनों का पंजीकरण: समाचार पत्रों और पुस्तकों के लिए पंजीकरण अनिवार्य करना।
■ दस्तावेज़ीकरण: प्रकाशित सामग्री की प्रतिलिपि राष्ट्रीय पुस्तकालय, कलकत्ता को भेजना ताकि उन्हें संरक्षित किया जा सके।
■ स्थान की घोषणा: मुद्रणालय का स्थान और मालिक का विवरण मजिस्ट्रेट के पास जमा करना।
■ जवाबदेही: प्रकाशक और मुद्रक का नाम स्पष्ट रूप से छापना।
■ अन्य नाम/समानार्थी (Synonyms):
प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम (Press and Registration of Books Act)
■ पीआरबी अधिनियम, 1867 (PRB Act, 1867)
प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867
■ उपयोग और उदाहरण (Usage Examples):
पंजीकरण (Registration): समाचार पत्र शुरू करते समय प्रेस महापंजीयक (RNI) के पास पंजीकरण।
■ दस्तावेज़ जमा करना (Submission): प्रकाशक द्वारा पुस्तक की प्रति 30 दिनों के भीतर नेशनल लाइब्रेरी को सौंपना।
■ कानूनी कार्रवाई (Legal Action): यदि कोई समाचार पत्र बिना पंजीकरण के प्रकाशित होता है, तो उस पर इस अधिनियम के तहत कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।
[[ नोट ]] : 2024 में इस अधिनियम को निरस्त कर दिया गया है और इसके स्थान पर नया “प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण अधिनियम” लागू किया गया है।■ प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण (पीआरपी) अधिनियम, 2023 (Press and Registration of Periodicals Act, 2023) भारत में समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और डिजिटल समाचारों के पंजीकरण, नियमन और प्रकाशन को नियंत्रित करने वाला कानून है, जो 1 मार्च 2024 से लागू हुआ है। यह 1867 के पुराने औपनिवेशिक कानून को प्रतिस्थापित (replace) करता है, जो अब पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल हो गया है, जिसे ‘प्रेस सेवा पोर्टल’ के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है।
■ मुख्य विवरण (Key Details):
नया कानून: प्रेस और पीरिऑडिकल्स पंजीकरण अधिनियम, 2023।
पुराना कानून: प्रेस और पुस्तकें पंजीकरण (PRB) अधिनियम, 1867 (अब निरस्त)।
■ प्रक्रिया: अब पूर्ण रूप से ऑनलाइन, डिजिटल और सरल (Physical declaration की आवश्यकता नहीं)।
■ नियामक संस्था: भारत के प्रेस रजिस्ट्रार जनरल (PRGI – पूर्व में RNI), जो सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
■ प्रेस एवं पत्रिका पंजीकरण अधिनियम के मुख्य बिंदु:
● ऑनलाइन पंजीकरण: समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन।
● डिजिटल समाचार शामिल: अब ऑनलाइन समाचारों को भी इस अधिनियम के तहत पंजीकरण की सुविधा है।
● सरलीकृत प्रक्रिया: शीर्षक (Title) की उपलब्धता और पंजीकरण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया गया है।
● वार्षिक विवरण: प्रकाशकों के लिए हर साल प्रेस रजिस्ट्रार जनरल को विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
● अनुपालन: समाचार पत्र की एक प्रति 48 घंटे के भीतर जमा करनी होती है।
● इस अधिनियम के प्रमुख उपयोग/उदाहरण (Usage Examples):
पत्रिका/अखबार का पंजीकरण (Registration of Periodicals): किसी भी नई पत्रिका का नामथ (Title) बुक करने और पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए।
● ऑनलाइन समाचार पोर्टल (Digital Media): नए नियम के अनुसार डिजिटल समाचार पोर्टल को अपने प्रकाशन को पंजीकृत कराने के लिए।
● मुद्रणालय की सूचना (Printing Press Info): प्रिंटिंग प्रेस को अपने विवरण ऑनलाइन जमा करना।
● रजिस्टर का रखरखाव: पीआरजीआई (PRGI) द्वारा पंजीकृत पत्रिकाओं का एक डिजिटल रिकॉर्ड रखना।
●अधिनियम के पर्यायवाची/संबंधित नाम:
पीआरपी अधिनियम, 2023 (PRP Act, 2023)
प्रेस और पीरिऑडिकल्स पंजीकरण बिल (Press and Registration of Periodicals Bill)
प्रेस सेवा पोर्टल (Press Sewa Portal)
● प्रेस रजिस्ट्रार जनरल (Press Registrar General)
■■卐卐 संपादक/ लेखक को वेतन/राॅायल्टी:- भारत में प्रकाशन जगत में लेखक (Author) और संपादक (Editor) की रॉयल्टी और पारिश्रमिक संरचना अलग-अलग होती है। सामान्यतः, संपादक को रॉयल्टी के बजाय निश्चित वेतन या शुल्क मिलता है, जबकि लेखक को किताब की बिक्री पर रॉयल्टी मिलती है। वैसे प्रधान संपादक /प्रकाशक/मुद्रक, जिसके नाम से भारत सरकार निबंधित टाईटल पेटेंट किया है उनहें उच्च स्तरीय राॅयल्टी देने का प्रावधान है, इसके लिए टाईटल धारक को संपादकीय लेखन क्षेत्र में कम से कम 5-10 वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। संपादक, लेखक को कापीराइट संरक्षण का पूर्ण अधिकार होता है, यदि कोई भी व्यक्ति किसी भी संपादक, लेखक का लेखन साहित्य सामग्री चोरी या तोङ ममोङ कर लिखने या प्रकाशित करने की कोशिश की तो कापीराइट अपराध के अंतर्गत आर्थिक मानहानि की राशि न्यायालय द्वारा वसूल किया जायगा, संपादक, लेखक के ब्रांड टाईटल पर निर्भर करता है कि विश्व में युनिक है या सिर्फ देश में युनिक है।
■ संपादक दो प्रकार के होते हैं। एक वह संपादक होता है जो लेखक को पुस्तक लेखन में सहायता करता है। इसमें पांडुलिपि को लेखन और प्रकाशन चरणों से गुजारने से लेकर पुस्तक की प्रूफरीडिंग करने वाले कॉपीएडिटर तक की भूमिकाएं शामिल हो सकती हैं। इन संपादकों को रॉयल्टी नहीं मिलती। संपादक शब्द का प्रयोग उस व्यक्ति के लिए भी किया जाता है जो संकलन तैयार करता है, कहानियों का चयन करता है और (यदि यह मौलिक संकलन है) तो कभी-कभी लेखकों के साथ मिलकर उन्हें बेहतर बनाने का काम करता है। इस प्रकार का संपादक संकलन तैयार करता है और इसलिए उसे रॉयल्टी मिलती है (कभी-कभी प्रकाशक रॉयल्टी को विभाजित करके सभी लेखकों को चेक भेजता है और कभी-कभी यह काम संपादक पर छोड़ दिया जाता है)। किसी भी अखबार/पत्रिका या मीडिया हाउस का प्रधान टाईटल धारक प्रधान संपादक हीं होता है। किसी अखबार/पत्रिका का मालिक, पेटेंट धारक को संवैधानिक अधिकार है कि उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शित करने वाले पत्रकार, लेखक या समाजसेवियों को स्थायी आर्थिक सहयोग कर सकती है, वशर्ते उस व्यक्ति में उच्च स्तरीय लेखन मानसिकता होनी चाहिए। लेखन साहित्य सामग्री उत्कृष्ट मानसिक संपति है जो प्राकृतिक है, इसको संरक्षित रखना किसी भी देश की सरकार को मौलिक अधिकार है, इसे क्षति पहुंचाने पर किसी भी स्तर के व्यक्ति को कठोर दण्डित किया जा सकता है।
○○●विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस 23 अपैल की वैज्ञानिक अभिवादन ○○●
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