आयकर विभाग आम करदाताओं से लगातार भाषाई भेदभाव कर रहा है और थोप रहा है अंग्रेजी

महोदय, आयकर विभाग ने 8 फरवरी 2026 को आयकर नियम 2026 के प्रारूप व नवीन फॉर्मों के प्रारूप जारी किये हैं, जिसके संदर्भ में मैं निम्नलिखित शिकायत दर्ज कराना चाहता हूँ:

1. आयकर विभाग द्वारा जनता के सुझावों के लिए जारी किए गये प्रारूप और इनकी प्रेस विज्ञप्ति केवल अंग्रेजी में जारी किये गये हैं जिससे विभाग की मंशा पर ही प्रश्न चिह्न लग गया है।

2. प्रस्तावित चार श्रेणियों में सुझावों से वंचित करना: विभाग ने भाषा के सरलीकरण (यह सबसे बड़ा ढोंग व मजाक है), मुकदमों में कमी, अनुपालन भार में कमी और अनावश्यक नियमों की पहचान जैसे चार महत्वपूर्ण विषयों पर सुझाव मांगे हैं। भाषा का सरलीकरण पर भाषा केवल अंग्रेजी ही रहेगी, यह क्रूर मजाक नहीं तो और क्या है, जिस भाषा को देश के 95 प्रतिशत लोग आज भी नहीं समझते हैं वही थोप रहे हैं और जनता से सुझाव भाषा के सरलीकरण पर माँगे जा रहे हैं।

3. अभूतपूर्व भाषाई भेदभाव: विज्ञप्ति में कहा गया है कि सुझाव देने के लिए ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक यूटिलिटी लॉन्च की गई है। चूँकि आधारभूत जानकारी (विज्ञप्ति) ही केवल अंग्रेजी में है, अतः गैर-अंग्रेजी भाषी जनता इस डिजिटल प्रक्रिया (ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण) का उपयोग करने से स्वतः ही वंचित हो गई है।

4. विभाग ने पूरी सोची समझी साजिश के तहत नियम के प्रारूप राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) का उल्लंघन करते हुए द्विभाषी जारी न करते हुए केवल अंग्रेजी में जारी किये हैं ताकि अंग्रेजी न जानने वाले देश के 95 प्रतिशत नागरिक सुझाव देने की प्रक्रिया से बाहर ही रहें।

5. आयकर विभाग ने इन नियमों व फार्मों पर सुझाव मँगाने के लिए प्रेस विज्ञप्ति भी केवल अंग्रेजी में जारी की गई है जबकि राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) के अनुसार हर विज्ञप्ति द्विभाषी (डिगलॉट) रूप में हिन्दी-अंग्रेजी में एकसाथ एक ही पृष्ठ पर जारी करना अनिवार्य है। इससे सिद्ध होता है कि आयकर विभाग हमेशा की तरह चाहता ही नहीं है कि आम जनता में आयकर अधिनियम व आयकर नियमों के प्रति जागरुकता आये, आयकर विभाग चाहता ही नहीं है कि आम जनता की उलझने कम हों, आयकर विभाग चाहता ही नहीं है कि प्रारूप नियमों पर देश की अंग्रेजी न जानने वाली जनता भी सुझाव दे सके। किसी भी लोकतांत्रिक देश में इस प्रकार विदेशी भाषा नहीं थोपी जाती है जैसी भारत में थोपी जा रही है।

6. आयकर फार्मों के प्रारूप भी केवल अंग्रेजी में ही जारी किये गये हैं जबकि 50 वर्ष पहले बने राजभाषा नियमावली 1976 के नियम 11 में स्पष्ट रूप से निर्देश है कि सभी प्रकार के आवेदन, फार्म, विवरणी आदि द्विभाषी (हिन्दी-अंग्रेजी में एकसाथ ऊपर-नीचे) रूप में तैयार किये जाएँगे। पीडीएफ व ऑनलाइन फार्मों के आगमन के प्रारंभिक वर्ष 2025 से ही आयकर विभाग लगातार इस नियम का उल्लंघन कर रहा है और कोई भी फॉर्म अब डिगलॉट रूप में तैयार ही नहीं किया जाता है इसलिए नवीन फार्मों के प्रारूप भी केवल अंग्रेजी में जारी किये गये हैं। सैकड़ों नागरिक शिकायतें कर चुके हैं पर भाषाई भेदभाव की अंतहीन शृंखला टूटती ही नहीं है और लगातार अंग्रेजी थोपने की प्रक्रिया और गंभीर होती जा रही है।

7. इन बातों से यह बात सिद्ध हो रही है कि आयकर विभाग के उच्चाधिकारी चाहते ही नहीं है कि जनता इन नियमों और फार्मों को समझें, उनका अनुपालन करे बल्कि वे चाहते हैं कि हमेशा की तरह आयकर के प्रावधान आम जनता के लिए अबूझ पहेली बने रहें और वे इनका अनजाने में उल्लंघन करने को बाध्य हों या फिर किसी न किसी सलाहकार के चंगुल में फँसे रहें, या आयकर अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित होते रहें। आयकर विभाग के पास अंग्रेजी प्रताड़ना करने का अमोघ अस्त्र है क्योंकि राजभाषा के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर न तो कोई दंड है और न ही किसी की कोई जिम्मेदारी। परंतु अंग्रेजी थोपकर केवल अंग्रेजी में जारी नोटिस, नियम व प्रावधान का अनजाने में हुए उल्लंघन पर दंड, जिम्मेदारी और प्रताड़ना जनता को झेलनी ही पड़ेगी।

8. आयकर विभाग राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) और राजभाषा नियमावली 1976 के नियम 11 पालन करने लग दाए तो देश की बहुसंख्यक आम जनता आयकर के प्रावधानों को सरलता से समझने लग जाएगी और अनजाने में होने वाले अनेक प्रकार उल्लंघनों से बच सकेगी। पर जब विभाग ऐसा चाहता ही नहीं है तो जनता की सुनवाई कहीं भी नहीं हो सकती है। देश की उच्च अदालतें भी केवल अंग्रेजी में काम करती हैं तो न्याय की गुहार भी जनता नहीं लगा सकती है।

9. इस देश में आज भी भारत सरकार के अधिकारी राजभाषा हिन्दी का प्रयोग करने को तैयार नहीं हैं क्योंकि राजभाषा का प्रयोग करेंगे तो जनता जागरुक हो जाएगी जबकि उच्चाधिकारी चाहते ही नहीं हैं कि जनता जागरुक हो।

10. चूँकि विभाग में मोटी तनख्वाह लेने वाले राजभाषा अधिकारी तैनात हैं तो आम जनता इतनी अपेक्षा तो कर सकती है कि विभाग राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) और राजभाषा नियमावली 1976 के नियम 11 का 100 प्रतिशत पालन करे, अन्यथा इतने सारे राजभाषा अधिकारी किस काम के लिए रखे गए हैं

11. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में प्रेस विज्ञप्तियाँ अन्य भारतीय भाषाओं में जारी की जाएँ ताकि अंग्रेजी के आधार पर किये जाने वाले इस भेदभाव पर कम से कम अब तो रोक लगे।

12. आयकर विभाग भारत सरकार के अन्य विभागों की भाँति ही अपने हर निर्णय में ,अपनी हर ऑनलाइन सुविधा में तो अंग्रेजी थोपकर भाषाई भेदभाव कर ही रहा है, राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3(3) और राजभाषा नियमावली 1976 के नियम 11 का भी खुला उल्लंघन लगातार और जानबूझकर कर रहा है।

13. आयकर विभाग राजभाषा नियमावली 1976 के नियम 11 के अनुसार पैन कार्ड आवेदन की ऑनलाइन सुविधा को द्विभाषी करने को तैयार नहीं है तो बाकी तो ईश्वर की भी शक्ति नहीं है कि आयकर विभाग में राजभाषा को प्राथमिकता व भारतीय भाषाओं को स्थान दिला सकें।

14. आयकर विभाग की अधिकांश सुविधाएँ केवल अंग्रेजी में हैं पर जिनमें राजभाषा हिन्दी का विकल्प दिया गया है वह इस प्रकार छिपा कर दिया गया है ताकि आम जनता उसे खोज भी न सके, संविधान के अनुच्छेद 343, 351 के अनुसार हिन्दी का प्राथमिकता, प्रधानता व वरीयता देना अनिवार्य है पर आयकर विभाग में हिन्दी की कोई हैसियत ही नहीं है। वेबसाइटों पर अविलंब राजभाषा को प्राथमिकता दी जाए व हर वेबसाइट का पहला पृष्ठ ही भाषा चुनने का विकल्प दे।

अतः आपसे निवेदन है कि इस गंभीर वैधानिक उल्लंघन पर तत्काल संज्ञान लिया जाए। मुझे पता है कि मेरी शिकायतों को आयकर विभाग सुनेगा नहीं पर मैं लगातार इस विभाग के ढोंग, भाषाई भेदभाव व अंग्रेजी थोपने के षड्यंत्र के विरुद्ध लिखता ही रहूँगा और एक न एक दिन इस विभाग को सुनना ही पड़ेगा।

 

भवदीय,

अभिषेक कुमार

ग्राम सुल्तानगंज, तह-बेगमगंज

जिला रायसेन, म.प्र. – 464570

प्रतिलिपि आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित:

1. माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार।

2. सचिव, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार।

3. सचिव, संसदीय राजभाषा समिति, भारत सरकार।

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