21 फरवरी वैज्ञानिक मानव शक्ति दिवस
उद्देश्य: विज्ञानमेव जयते के द्वारा स्थापित वैज्ञानिक प्रेसक्लबों के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में एकल मानव शक्ति यानि कि महिला-नेतृत्व, महिला के हाथ में, पुरुष नेतृत्व पुरुष के हाथ मे दोनो समानांतर ढंग से वैज्ञानिक भारत निर्माण सुनिश्चित करेंगे। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में वैज्ञानिक उपलब्धियों का जश्न मनाना और युवा पीढ़ी को प्रेरित करना विज्ञानमेव जयते के मुख्य उद्देश्य है।
विज्ञान के चार मुख्य अर्थ:
1. ज्ञान का व्यवस्थित निकाय (Body of Knowledge): यह तथ्यों, सिद्धांतों और अवधारणाओं का वह संग्रह है जो प्राकृतिक और भौतिक दुनिया के बारे में अवलोकन और प्रयोगों से प्राप्त होता है।
1. ज्ञान प्राप्त करने की विधि (Method/Process): यह वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) है—जिसमें अवलोकन, परिकल्पना, प्रयोग, विश्लेषण और निष्कर्ष निकालना शामिल है—जो विश्वसनीय और सत्यापन योग्य ज्ञान उत्पन्न करती है।
3. प्राकृतिक दुनिया का अध्ययन (Study of the Natural World): विज्ञान वह विद्या है जो जीवित और निर्जीव वस्तुओं, पृथ्वी और ब्रह्मांड की कार्यप्रणाली को समझने का प्रयास करती है, जैसे भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान।
4. तकनीकी अनुप्रयोग (Applied Science): यह वैज्ञानिक ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग है, जिससे नई तकनीकें विकसित होती हैं और जीवन की समस्याओं का समाधान होता है, जैसे इंजीनियरिंग और चिकित्सा।
प्रागैतिहासिक मानव की खोज प्रागैतिहासिक मानव की खोज मुख्य रूप से अफ्रीका में लगभग 70 लाख साल पहले शुरू हुई, जहाँ से ‘होमो’ प्रजाति 25-30 लाख वर्ष पूर्व विकसित हुई। पुरातात्विक साक्ष्यों, जैसे पत्थर के औजार, गुफा चित्रकारी, और जीवाश्मों (हथनोरा, भारत में 15 लाख वर्ष पुराना होमो इरेक्टस) के माध्यम से आदिमानवों के जीवन, शिकार-संग्रह और आग के उपयोग का पता चलता है। ऐसे माननीय इतिहास की खोज मानव शक्ति को दर्शाता है।
प्रागैतिहासिक मानव की खोज के प्रमुख बिंदु:
● मूल स्थान और विकास: मानव जैसे प्राणियों (होमिनिड्स) की उत्पत्ति अफ्रीका में लगभग 70 लाख वर्ष पूर्व हुई। होमो इरेक्टस (“सीधे खड़े होने वाला मानव”) लगभग 15 लाख वर्ष पूर्व प्रकट हुए, जिन्होंने अफ्रीका से बाहर प्रवास किया।
● प्रमुख खोजें: स्पेन में होमो एन्टिसेसर (850,000 साल पुराना) के अवशेष, और भारत में नर्मदा घाटी के हथनौरा में खोजे गए जीवाश्म।
● सांस्कृतिक और तकनीकी साक्ष्य: पत्थरों के औजार (कुल्हाड़ी, भाले), गुफा चित्रकारी (भीमबेटका), और आग के उपयोग के साक्ष्य मिले हैं, जो लगभग 10 लाख वर्ष पूर्व की मानवीय प्रगति को दर्शाते हैं।
● जीवनशैली: प्रारंभिक मानव शिकारी-संग्रहकर्ता (hunter-gatherers) थे जो छोटे कबीलों में रहते थे और मैमथ जैसे प्रागैतिहासिक जानवरों के साथ रहते थे।
● अध्ययन के स्रोत:
मानवविज्ञान (anthropology), पुरातत्व (archaeology), और जीवाश्म विज्ञान ने इस रहस्य को उजागर किया है कि कैसे आदिमानव होमो सेपियंस में विकसित हुए। ये सभी विषयवार विज्ञान की खोज करना विकसित मानव शक्ति को दर्षाता है। प्रागैतिहासिक मानव की खोज ने यह स्थापित किया है कि मानव सभ्यता का विकास पत्थरों के औजारों के उपयोग (पाषाण युग) से शुरू होकर कांस्य और लौह युग तक चला। उसके बाद मानव मस्तिष्क का वैज्ञानिक तंन्त्रिकातंत्र का तरंग, तूलमयी हो गया। इसे मानव शक्ति दिवस कहते है। इस अवसर पर स्कूल/ काॅलेजों में 14-21 वर्ष तक के अध्ययनरत छात्र छात्राओ को कोटीवार श्रृख्लाबद्ध ढंग से वैज्ञानिक संस्कृति एवं संस्कार को विकसित करना हीं मानव शक्ति को दर्शाता है।
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विज्ञानमेव जयते
भारत गणराज्य का राष्ट्रीय हिन्दी अंग्रेजी वैज्ञानिक मासिक पत्रिका ( RNI. भारत सरकार)
