राष्ट्रीय विज्ञान दिवस – 28 फरवरी
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस विज्ञान से होने वाले लाभों के प्रति समाज में जागरूकता लाने और वैज्ञानिक सोच पैदा करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तत्वावधान में हर साल 28 फरवरी को भारत में मनाया जाता है। विज्ञानमेव जयते, भारत गणराज्य का राष्ट्रीय हिन्दी अंग्रेजी वैज्ञानिक मासिक पत्रिका, 2015 से राष्ट्रीय विज्ञान सप्ताह कार्यक्रम के रुप में, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को मना रहा है।
दिवसों का विवरण निम्नलिखित है:-
● 20 फरवरी विज्ञानमेव जयते स्थापना दिवस .
● 21 विज्ञानमेव जयते मानव शक्ति दिवस.
● 22 फरवरी वैज्ञानिक सदभावना दिवस.
● 23 फरवरी वैज्ञानिक धम्म दिवस.
● 24 फरवरी वैज्ञानिक रत्न दिवस.
● 25 फरवरी वैज्ञानिक खोज दिवस.
● 26 फरवरी वैज्ञानिक सम्मान दिवस.
● 27 फरवरी बाल वैज्ञानिक दिवस.
● 28 फरवरी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस.
इस तरह से विज्ञानमेव जयते भारत गणराज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में वैज्ञानिक प्रेसक्लब बोर्ड एवं साईस क्लब की स्थापना कर वैज्ञानिक गतिविधियों को संचालित किया जाता है, उत्कृष्ट कार्य एवं प्रदर्शन करने वाले प्रेसक्लब बोर्ड एवं साईस क्लब को आर्थिक से प्रोत्साहित किया जाता है, ये सभी आर्थिक प्रोत्साहन पत्रिका संचार एवं प्रकाशन, डिजिटल पत्रिका संचार एवं मेम्बरशिप शुल्क लेना आवश्यक है, पत्रकारिता उत्कृष्ट व्यवसाय है, सामान्य वैज्ञानिक मानसिकता एवं विचारधारा के लोगो को सम्मिलित एवं सम्मानित किए जाते हैं।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस रमन प्रभाव की खोज के कारण मनाया जाता है। इस खोज की घोषणा भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रमन (सर चन्द्रशेखर वेंकटरमन ने 28 फरवरी सन् 1928 को की थी। इसी खोज के लिये उन्हे 1930 में नोबल पुरस्कार दिया गया था।
रमन प्रभाव क्या है ?
रमन प्रभाव (Raman Effect) प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering) की एक घटना हैजिसमें जब प्रकाश की किरण किसी पारदर्शी पदार्थ (ठोसद्रव या गैस) से गुजरती हैतो उसके अणुओं से टकराकर उसकी तरंगदैर्ध्य (wavelength) और आवृत्ति (frequency) में बदलाव आ जाता है। यह परिवर्तन अप्रत्यास्थ प्रकीर्णन के कारण होता हैजो पदार्थों की आणविक संरचना की पहचान करने में मदद करता है।
रमन प्रभाव के मुख्य बिंदु:
● खोज: भारतीय वैज्ञानिक सर सी.वी. रमन ने 28 फरवरी 1928 को की थीजिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला।
● प्रक्रिया: जब प्रकाश के फोटॉन (फोटॉन) किसी पदार्थ के अणुओं से टकराते हैंतो वे ऊर्जा का आदान-प्रदान करते हैंजिससे प्रकीर्णित प्रकाश की ऊर्जा बदल जाती है।
● रमन रेखाएं: प्रकीर्णित प्रकाश में आपतित प्रकाश की आवृत्ति के अलावा अन्य आवृत्तियां भी दिखाई देती हैंजिन्हें ‘रमन रेखाएं’ (Raman lines) कहते हैं।
● महत्व: यह रसायनोंदवाओंऔर सामग्री की संरचना का पता लगाने (spectroscopy) में उपयोग किया जाता है।
● राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: इस ऐतिहासिक खोज के सम्मान में भारत में हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। सर सी.वी. रमन ने यह बताया कि यह प्रभाव समुद्र और आकाश के नीले रंग के लिए भी उत्तरदायी है।
निष्कर्ष:- विज्ञानमेव जयते भारत गणराज्य का राष्ट्रीय हिन्दी अंग्रेजी वैज्ञानिक मासिक पत्रिका PRGI भारत सरकार के अधीन निबंधित है, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार से सम्बद्धता प्राप्त है, विज्ञानमेव जयते वैज्ञानिक अनुसंधान एवं वैज्ञानिकता पर भरोषा एवं विश्वास करता है।
विज्ञानमेव जयते के श्लोक-
वैज्ञानिक धम्म अपनाईये।
वैज्ञानिक भारत बनाइए। ।
वैज्ञानिक ढंग से सोंचे…
वैज्ञानिक ढंग से करें….
THE SCIENCE… THE TRUE….. THE BEAUTIFUL’S.
” वैज्ञानिक बुनियाद पर भारत का भविष्य लिखते हैं हम ”
विज्ञानमेव जयते वैज्ञानिक धम्म का प्रचार प्रसार करता है, कोई भी व्यक्ति विज्ञानमेव जयते सदस्य बनकर प्रचार प्रसार कर सकता है, विज्ञानमेव जयते मुख्य रूप से 14-17 एवं 18-25 वर्ष तक के अध्ययनरत छात्र छात्राओ पर हीं अनुसंधान एवं खोज करता है, विज्ञानवीर का श्रृखला बनाकर वैज्ञानिक भारत का निर्माण करता है.
जय विज्ञान… जय भारत…
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