धरती की ख़ामोश पुकार: क्या हम सुन रहे हैं

जब प्रकृति बोलती है और मनुष्य सुनना भूल जाता है

धरती कभी चिल्लाती नहीं। वह आदेश नहीं देती। वह बस संकेत भेजती है।

  • कभी बाढ़ बनकर,
  • कभी सूखे की चीख़ में,
  • कभी पिघलते ग्लेशियरों की ख़ामोशी में,
  • और कभी आसमान से गिरती आग जैसी गर्मी में।

सवाल यह नहीं है कि धरती क्या कर रही है—

सवाल यह है कि क्या हम उसकी भाषा समझ रहे हैं?

🌍 धरती की ख़ामोश पुकार

एक समय था जब धरती इंसान की माँ थी—

धैर्यवान, क्षमाशील, और अन्न देने वाली।

आज वही धरती-

  • थकी हुई लगती है।
  • नदियाँ सिकुड़ रही हैं
  • जंगल सिसक रहे हैं
  • समुद्र चुपचाप आगे बढ़ रहे हैं
  • हवा साँस लेने से पहले डराती है

ये हादसे नहीं हैं। ये पत्र हैं, जो धरती हमें भेज रही है।

🔥 चेतावनी या सज़ा?

जब शहर डूबते हैं, जब खेत जलते हैं, जब मौसम अपने नियम तोड़ता है—

तो हम इसे “प्राकृतिक आपदा” कह देते हैं। लेकिन क्या सच में यह प्रकृति की गलती है?

धरती सज़ा नहीं देती। वह सिर्फ़ आईना दिखाती है।जो जैसा बोता है, वही काटता है।

🏭 विकास बनाम विनाश

हमने विकास को सिर्फ़ ऊँची इमारतों और तेज़ मशीनों में मापा।

  • जंगल काटे
  • नदियाँ बाँधी
  • पहाड़ खोले
  • हवा को ज़हर बनाया

और फिर हैरान हैं कि धरती क्यों असंतुलित हो गई।

क्या यह विकास है—या धीरे-धीरे किया गया आत्मघात?

🧒 आने वाली पीढ़ियों से सवाल

कल्पना कीजिए, कल कोई बच्चा पूछे—

जब तुम्हें पता था कि धरती बीमार है, तो तुमने उसे क्यों नहीं बचाया?”

उस सवाल का जवाब आज के हमारे फैसलों में छिपा है।

🌱 अभी भी समय है

धरती ने अभी दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं किया है।वह अभी भी उम्मीद रखे बैठी है।

  • पेड़ आज भी उग सकते हैं
  • नदियाँ आज भी साफ़ हो सकती हैं
  • ऊर्जा आज भी हरित बन सकती है
  • इंसान आज भी बदल सकता है

लेकिन यह बदलाव नीति से नहीं, नियत से आएगा।

❤️ धरती क्या चाहती है?

धरती हमसे कोई बलिदान नहीं माँगती।

वह सिर्फ़ इतना चाहती है—

थोड़ा संयम

थोड़ा सम्मान

और थोड़ा प्रेम

जिस दिन इंसान धरती को “संसाधन” नहीं, “संबंध” समझ लेगा, उसी दिन चेतावनियाँ आशीर्वाद बन जाएँगी।

🌏 अंतिम पंक्तियाँ

धरती हमें छोड़ नहीं रही। वह हमें जगा रही है। अब फैसला हमारे हाथ में है—

चेतावनी को सुनें या खामोशी में सब कुछ खो देंक्योंकि जब धरती चुप हो जाएगी, तब इंसान के पास कहने को कुछ भी नहीं बचेगा।

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MANOJ ADHYAYI, Sr AI PROJECT MANAGER

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