गुजरात मॉडल और भारत

माँ स्वरूप वसुंधरा छोटे-छोटे राज्यों को अपने हृदय में समेटे हुए विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण है। यही हमारी अमूल्य धरोहर है। भारत को यूँ ही ‘विश्व गुरु’ नहीं कहा जाता। यह केवल एक उपाधि नहीं, बल्कि हमारी प्राचीन परंपरा और ऋषि-मुनियों द्वारा संजोए गए ज्ञान के भंडार का प्रतीक है। आज भारत तीव्र गति से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है और हर राज्य को बराबरी का अधिकार मिल रहा है, ताकि वे सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते रहें।

जब भी किसी सफल राज्य की चर्चा होती है, तो गुजरात का नाम प्रमुखता से आता है। महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे महान नेताओं की जन्म भूमि होने के साथ-साथ गुजरात ने आर्थिक प्रगति और प्रशासनिक दक्षता में भी अग्रणी स्थान बनाया है।

गुजरात शासन मॉडल

गुजरात शासन मॉडल से तात्पर्य उस प्रशासनिक और विकास शैली से है, जो विशेष रूप से श्री नरेंद्र मोदी के मुख्य मंत्री कार्य काल के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हुई। 2014 के आम चुनावों में यह राजनैतिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली साबित हुआ।

इस मॉडल का सार है, तेज़ फैसले, बेहतर सुविधाएँ और अधिक निवेश। सरकार द्वारा सड़कों, बिजली, उद्योगों और बंदरगाहों पर विशेष ध्यान दिया गया। उद्योग लगाने वालों को सहूलियतें दी गई, जिससे रोज़गार और राज्य की आय दोनों बढ़े। परिणाम स्वरूप फैक्ट्रियाँ बढ़ीं, शहर विकसित हुए और अर्थ व्यवस्था मज़बूत हुई।

इस मॉडल का मूल मंत्र रहा है “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन”। सरकारी कामकाज को ऑनलाइन कर जटिलताओं को दूर किया गया जिससे ‘ई-गवर्नेंस’ को बढ़ावा मिला। स्थिर औद्योगिक नीतियों ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया और अनिश्चितता का माहौल समाप्त किया।

गुजरात ने स्वयं को ‘निवेशक मित्र’ राज्य के रूप में स्थापित किया। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ के माध्यम से वैश्विक निवेश आकर्षित हुआ और व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित की गई। साणंद में ऑटोमोबाइल उद्योग, जाम नगर और मुंद्रा में पेट्रोकेमिकल्स एवं निर्यात केंद्र विकसित कर हज़ारों रोज़गार के अवसर पैदा किए गए। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) बनाए गए और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ज़मीन, बिजली और पानी जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं।

मज़बूत बुनियादी ढाँचा किसी भी विकास मॉडल की रीढ़ होता है, और गुजरात ने इसे प्राथमिकता दी।

ज्योतिग्राम योजना: ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। कृषि और घरेलू उपयोग के लिए अलग फीडर लाइनों ने ऊर्जा वितरण की दक्षता बढ़ाई।

अक्षय ऊर्जा: 2009 की सौर ऊर्जा नीति के साथ गुजरात ने सौर ऊर्जा में अग्रणी भूमिका निभाई। चारणका सोलर पार्क और ‘नहर-शीर्ष’ परियोजनाएँ नवाचार के उत्कृष्ट उदाहरण बने।

बंदरगाह विकास: 1600 किमी लंबी तट रेखा का लाभ उठाते हुए मुंद्रा और कंडला जैसे बंदरगाहों को वैश्विक स्तर का बनाया गया।

गुजरात मॉडल सिर्फ औद्योगिक विकास तक ही सीमित नहीं रहा। कृषि और रोजगार क्षेत्र में भी गुजरात ने उल्लेखनीय प्रगति करी। पानी की कमी से निपटने के लिए ड्रिप सिंचाई और स्प्रिंकलर सिस्टम को बड़े पैमाने पर अपनाया गया। चेक डैम बनाकर सौराष्ट्र जैसे सूखे क्षेत्रों में भी भूजल स्तर को सुधारा गया। छोटे उद्योगों और ग्रामीण उद्योगों को ऊर्जा सुरक्षा दी गई, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा। गाँवों को सड़कों द्वारा शहरों से जोड़ा गया, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा में सुधार हुआ।

भारत और गुजरात मॉडल

भारत की विविधता को देखते हुए किसी एक राज्य का मॉडल दूसरे राज्य में हूबहू लागू करना चुनौती पूर्ण है। फिर भी हर राज्य की सफलता ही भारत की सफलता का पैमाना है। गुजरात मॉडल यह सिद्ध करता है कि स्पष्ट दृष्टि, प्रशासनिक इच्छा शक्ति और स्थिर नीतियाँ किसी भी राज्य को विकास की राह पर अग्रसर कर सकती हैं। कठिन परिश्रम और ‘देश सर्वोपरि’ की भावना के साथ हम भारत को विश्व में और अधिक बुलंदियों तक पहुँचा सकते हैं।

✍️ रत्ना पांडे, वडोदरा (गुजरात)

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