बजट 2026 के बाद की कहानी: आम जनता की जुबानी

बजट 2026 पेश होते ही सरकार ने इसे “स्थिरता, निवेश और भविष्य की तैयारी” का दस्तावेज़ बताया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 7% से अधिक विकास दर, पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी और विनिर्माण को नई गति देने का दावा किया। लेकिन बजट के बाद बाज़ार, घर और दफ़्तर—तीनों जगह एक ही सवाल गूंज रहा है: क्या यह विकास ज़मीन पर दिखेगा या फ़ाइलों में सिमटकर रह जाएगा?

1️⃣ GDP तेज़, जेब धीमी—यह विरोधाभास क्यों?

आँकड़े कहते हैं कि अर्थव्यवस्था दौड़ रही है, पर परिवारों की जेब बताती है कि चाल धीमी है। वेतन बढ़ोतरी महँगाई के साथ कदम नहीं मिला पा रही, बचत दर दबाव में है और उपभोग खर्च ठिठका हुआ। GDP में उछाल बड़े प्रोजेक्ट्स और सरकारी खर्च से दिखता है, लेकिन खपत-आधारित विकास की नब्ज़ अभी कमजोर है।

सवाल: अगर विकास समावेशी है, तो मध्यम वर्ग की चिंता क्यों बढ़ रही है?

2️⃣ कैपेक्स बूस्ट: कल का इंजन, आज की दुविधा

बजट 2026 ने सड़क, रेल, रक्षा और विनिर्माण में पूंजीगत व्यय (Capex) को आगे बढ़ाया। यह भविष्य की नींव है—रोज़गार, सप्लाई चेन और उत्पादकता के लिए ज़रूरी भी।

लेकिन समस्या समय की है। कैपेक्स का असर देर से आता है, जबकि महँगाई और EMI का असर तुरंत। आज का उपभोक्ता राहत चाहता है, कल का उद्योग भरोसा।

3️⃣ रोज़गार का सवाल: विकास बिना नौकरी?

AI, ऑटोमेशन और औपचारिकरण के दौर में जॉबलेस ग्रोथ की बहस तेज़ है। संगठित क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ी है, पर नई नौकरियों की गति अपेक्षा से कम। कौशल और मांग के बीच खाई बनी हुई है—जिसे सिर्फ घोषणाओं से नहीं, ज़मीनी क्रियान्वयन से पाटा जा सकता है।

4️⃣ महँगाई, टैक्स और भरोसा

कर-संरचना में स्थिरता स्वागतयोग्य है, लेकिन राहत सीमित। ईंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य और शहरी आवास—ये वही मदें हैं जो घर का बजट बिगाड़ती हैं। विकास की कहानी तभी विश्वसनीय होगी जब जीवन-यापन की लागत काबू में आए।

5️⃣ आँकड़े बनाम ज़मीनी हकीकत

आर्थिक आँकड़े आवश्यक हैं—पर वे अनुभव का विकल्प नहीं। अगर विकास वास्तविक है, तो उसकी धड़कन बाज़ार में, नौकरी में और घर की बचत में सुनाई देनी चाहिए। वरना यह सवाल बना रहेगा कि कहीं यह “स्टैटिस्टिकल इल्यूज़न” तो नहीं?

निष्कर्ष: कहानी अधूरी नहीं, पर परीक्षा बाकी

बजट 2026 में दिशा है—पर मंज़िल तक पहुँचने के लिए गति, समावेशन और भरोसा चाहिए। विकास की कहानी तभी पूरी होगी जब आँकड़े और आम आदमी की ज़िंदगी एक सुर में बोलें।

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MANOJ ADHYAYI, Sr AI PROJECT MANAGER

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