जो सबसे ताक़तवर थे, वही क्यों मिट गए?

धरती का इतिहास अजीब सवाल पूछता है—

जो सबसे ताक़तवर थे, वही क्यों मिट गए?

और जिन्हें हम कमज़ोर समझते थे, वही कैसे आज तक ज़िंदा हैं?

कभी इस धरती पर डायनासोर का राज था।

आसमान छूते शरीर, लोहे जैसे दाँत,

पूरी धरती पर दहशत।

फिर… एक दिन—

वे सब कहानी बन गए।

और उन्हीं दिनों, अंधेरी दरारों में

चुपचाप काँपते छोटे-छोटे स्तनधारी—

जिन्हें कोई देखता भी नहीं था—

वे बच गए।

उन्होंने इतिहास की सबसे बड़ी बाज़ी जीत ली।

ताक़त का भ्रम और अनुकूलन की सच्चाई

प्रकृति में सबसे बड़ा भ्रम है—

कि ताक़त ही जीवन की गारंटी है।

जबकि सच्चाई यह है कि

प्रकृति ताक़त को नहीं, अनुकूलन को चुनती है।

डायनासोर शक्तिशाली थे,

लेकिन बदलाव के सामने कठोर।

उन्हें बहुत भोजन चाहिए था,

एक खास माहौल चाहिए था,

और बदलाव के लिए समय चाहिए था—

जो प्रकृति ने नहीं दिया।

जब आसमान धूल से ढक गया,

सूरज बुझने लगा,

पेड़-पौधे मरने लगे—

ताक़त बोझ बन गई।

वहीं छोटे जीव—

कम खाते थे,

बिलों में छिप सकते थे,

जो मिला वही खा लेते थे,

और जल्दी-जल्दी नई पीढ़ी ला सकते थे।

उन्होंने झुकना सीखा—

और झुकने वाले ही तूफ़ान में बचते हैं।

आज की दुनिया में शेर क्यों हार रहा है?

आज भी कहानी वही है—

सिर्फ़ किरदार बदले हैं।

शेर, बाघ—

जंगल के राजा—

आज ख़तरे में हैं।

क्यों?

क्योंकि उन्हें चाहिए:

बड़ा जंगल

खुला आकाश

भरपूर शिकार

शांति

और इंसान दे रहा है:

कटते जंगल

सड़कें

शहर

शोर

टकराव

शेर बदलाव की रफ़्तार नहीं पकड़ पा रहा,

लेकिन चूहा, कौआ, कुत्ता—

इंसान के साथ जीना सीख गए।

जहाँ कचरा है, वहाँ भोजन है।

जहाँ दीवार है, वहाँ घर है।

जो सीख गया—वही टिक गया।

प्रकृति का क्रूर लेकिन ईमानदार नियम

प्रकृति भावुक नहीं होती।

वह न ताक़त देखती है,

न गौरव,

न इतिहास।

वह बस एक सवाल पूछती है—

“क्या तुम बदल सकते हो?”

अगर जवाब ‘हाँ’ है—

तो जीवन मिलता है।

अगर ‘न’—

तो मिट्टी में नाम लिख दिया जाता है।

एक गहरी सीख—हमारे लिए भी

यह कहानी सिर्फ़ जानवरों की नहीं है।

यह इंसान के लिए भी चेतावनी है।

तकनीक, सत्ता, ताक़त—

अगर वे बदलाव के साथ नहीं चलें,

तो वे भी डायनासोर बन जाती हैं।

भारी पेड़ तूफ़ान में टूट जाते हैं,

लेकिन घास झुककर फिर खड़ी हो जाती है।

निष्कर्ष

इस धरती पर

सबसे ताक़तवर नहीं,

सबसे तेज़ नहीं,

सबसे बड़ा नहीं—

सबसे अनुकूल जीव ही अमर होता है।

डायनासोर की हड्डियाँ हमें यही बताती हैं—

और चुपचाप भागता चूहा,

उसी सच्चाई का जीवित प्रमाण है।

भविष्य उनका है—

जो बदलती दुनिया से डरते नहीं,

उसके साथ बदल जाते हैं।

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MANOJ ADHYAYI, Sr AI PROJECT MANAGER

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