केन्द्रीय वित्त बजट 2026-2027 में बिहार के कई क्षेत्रों में तेज प्रगति, कई में पिछड़े और धीमी प्रगति

बिहार का ताजा बजट (2026-27) ₹3.47 लाख करोड़ का है, जो पिछले साल से काफी बड़ा है। लेकिन अन्य राज्यों से तुलना करने पर बिहार की स्थिति मिश्रित दिखती है — कुछ क्षेत्रों में तेज प्रगति, लेकिन कई में अभी भी पिछड़ापन।

* चलिए, मुख्य पैरामीटर्स पर तुलनात्मक विश्लेषण (2024-25/2025-26 के लेटेस्ट अनुमानों और 2026-27 बजट के आधार पर):

1. कुल बजट साइज (State Budget Size)

*********************

बिहार का बजट अब काफी बड़ा हो गया है, लेकिन टॉप राज्यों से कम है क्योंकि जनसंख्या ज्यादा है और GSDP छोटा। बजट साइज (लगभग, हालिया वर्ष)

उत्तर प्रदेश

₹7-8 लाख करोड़+ (2025-26 में बड़ा)

सबसे बड़ा बजट, जनसंख्या के कारण

महाराष्ट्र: ₹6 लाख करोड़+ आर्थिक हब

तमिलनाडु: ₹4-5 लाख करोड़ +इंडस्ट्रियल

बिहार: ₹3.47 लाख करोड़ (2026-27) – तेज बढ़ोतरी (पिछले साल ₹3.17 लाख करोड़)

पश्चिम बंगाल: ₹3-3.5 लाख करोड़

गुजरात: ₹3-4 लाख करोड़ – इंडस्ट्री फोकस

बिहार का बजट 2005 के ₹26 हजार करोड़ से 13 गुना बढ़ा, लेकिन per capital खर्च अभी भी कम।

2. विकास दर (GSDP Growth Rate)

*********************

यहाँ बिहार बहुत मजबूत है — लगातार राष्ट्रीय औसत से ऊपर।

बिहार: 2024-25 में 13.1% (current prices), 2025-26 अनुमान 14.9% या इससे ज्यादा।

भारत औसत: 9.8% (2024-25)।

असम (12%+ कुछ साल),

उत्तर प्रदेश (11-12%),

गुजरात/कर्नाटक (10-12%)

— बिहार टॉप 5-10 में है।

पिछले 3-4 साल: बिहार 14-18% ग्रोथ कई बार, जबकि राष्ट्रीय 9-12%।

सकारात्मक: बिहार तेजी से कवर कर रहा है — सेकंडरी सेक्टर (मैन्युफैक्चरिंग) और पब्लिक इन्वेस्टमेंट से।

3. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita GSDP/Income)

*********************

यहाँ बिहार सबसे नीचे है — सबसे बड़ी चुनौती।

Per Capita GSDP (₹, 2024-25 अनुमान)

राज्य/क्षेत्र भारत औसत से तुलना

गोवा/दिल्ली

4-8 लाख+

3-4 गुना ज्यादा

तेलंगाना/कर्नाटक

3-4 लाख

2-3 गुना

गुजरात/महाराष्ट्र

2.5-3 लाख

2 गुना

भारत औसत

~2 लाख (2024-25)

उत्तर प्रदेश

~1.2-1.3 लाख

कम

बिहार

₹76,490 (2024-25)

भारत औसत का ~35-40%

बिहार की per capita आय राष्ट्रीय औसत से आधी से भी कम। पटना जिले में ज्यादा (~₹2.4 लाख), लेकिन ग्रामीण इलाकों में बहुत कम।

कारण: ज्यादा जनसंख्या (13 करोड़+), कम इंडस्ट्री, माइग्रेशन।

4. बजट में सेक्टरल फोकस

*********************

(तुलना PRS रिपोर्ट्स से, 2025-26 आधार पर)

बिहार शिक्षा, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य पर ज्यादा % खर्च करता है (औसत से ऊपर), लेकिन कृषि/सिंचाई/सड़कों पर कम।

शिक्षा: बिहार 21-22% (औसत राज्यों से ज्यादा)।

ग्रामीण विकास: 10%+ (औसत 5%)।

स्वास्थ्य: 6-7% (औसत के करीब या थोड़ा ऊपर)।

सड़कें/इंफ्रा: अच्छा फोकस, लेकिन % में कुछ राज्यों से कम।

कृषि: कम % (औसत से नीचे)।

कुल मिलाकर तुलना और विश्लेषण

मजबूत पक्ष (बिहार आगे):

विकास दर — सबसे तेज राज्यों में (राष्ट्रीय से 3-5% ज्यादा)।

बजट ग्रोथ — 10-15% सालाना बढ़ोतरी।

कैपिटल एक्सपेंडिचर — 65% (इंफ्रा पर फोकस, कई राज्यों से बेहतर)।

केंद्र से फंड — ₹1.62 लाख करोड़ (2026-27 में), Purvodaya स्टेट्स में शामिल।

कमजोर पक्ष (बिहार पीछे):

Per capita आय — सबसे कम (गरीबी, माइग्रेशन का कारण)।

इंडस्ट्री/प्राइवेट निवेश — कम (गुजरात, TN, कर्नाटक से बहुत पीछे)।

क्रियान्वयन — घोषणाएं अच्छी, लेकिन कई स्कीम्स में देरी/कम यूज।

16th फाइनेंस कमीशन — हिंदी हार्टलैंड स्टेट्स (बिहार सहित) को टैक्स शेयर में थोड़ी कमी।

और अंत में

*********************

बिहार “तेजी से उभरता” राज्य है — ग्रोथ रेट से 5-10 साल में per capita में सुधार आएगा, लेकिन अभी भी UP, MP जैसे राज्यों से आगे नहीं। निम्नलिखित सिद्धांत आवश्यक है

1. अगर 1 करोड़ जॉब्स, एक्सप्रेस-वे, इंडस्ट्री नीतियां काम कर गईं, तो बिहार विकसित राज्यों की लिस्ट में आएगा। बदलाव दिख रहे हैं (नई सड़कें, बिजली), लेकिन ग्रामीण बिहार को और तेज push चाहिए।

2. 2026-27 के वित्त बजट को बारिकी से अध्ययन करने के बाद स्पष्ट हो पाया कि बिहार में तकनीक मैनेजमेंट की आवश्यकता है।

3. जनसंख्या के आधार पर बजट पर जोर देने की आवश्यकता थी , फिर भी पहले से बहुत हीं अच्छा है।

4. रोजी- रोजगार, इन्डस्ट्री और महंगी वस्तुओं की प्रोडक्शन केन्द्र खोलने की आवश्यकता थी, इससे बिहार का पलायन रूक सकता है , लोग अपने बिहार में रोजगारयुक्त , व्यवसाययुक्त होकर सम्पन्न होते।

5. बैंकों की ऋण प्रणाली को आसान करना अति आवश्यक है, छोटे- बङे कुटीर उद्योग, लघु उद्योग सहकारी संगठन, गैर सरकारी संगठन विभिन्न स्तर के निबंधित क्लबों के माध्यम से छात्र छात्राओ के कौशल के आधार पर रोजगार सृजन केन्द्र स्थापित करने की आवश्यकता है। इसके अलावें बिहार में रिश्वत परम्परा का जबतक मानसिक रूप से उन्मूलन नहीं होगा तब तक सुधार पाना मुश्किल है।

6. बिहार सरकार को बिहार के कोष को मजबूत करने के लिए किसानी एवं उद्योग जगत को मजबूत करते हुए मद्यपान विभाग को शर्तानुसार लागू करने की आवश्यकता है।

अखण्ड धन्यवाद

—-+++—-

(डाॅ बासुदेव कुमार शर्मा)

प्रधान संपादक

विज्ञानमेव जयते RNI भारत सरकार

Email- vigyanmevajayateworld@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *