रिसर्च और डेवलपमेंट: राष्ट्रों की असली ताक़त
आज की दुनिया में किसी देश की शक्ति का आकलन केवल उसकी जनसंख्या, सेना या प्राकृतिक संसाधनों से नहीं होता। असली मापदंड है—वह देश भविष्य की तकनीक कितनी खुद विकसित कर रहा है। यही कारण है कि Research & Development (R&D) अब राष्ट्र-निर्माण का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है।
रिसर्च पर खर्च: विकसित देशों की साझा नीति
Israel
इज़राइल अपनी GDP का लगभग 5.5% रिसर्च और डेवलपमेंट पर खर्च करता है—दुनिया में सबसे अधिक।
परिणाम: यह छोटा-सा देश आज साइबर सिक्योरिटी, रक्षा तकनीक, कृषि नवाचार और मेडिकल साइंस में वैश्विक नेतृत्व करता है। सीमित संसाधनों के बावजूद यह दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्ट-अप नेशन कहलाता है।
South Korea
दक्षिण कोरिया GDP का करीब 4.9% R&D में निवेश करता है।
परिणाम: कुछ दशकों पहले युद्ध से जूझ रहा यह देश आज सेमीकंडक्टर, 5G, AI और रोबोटिक्स में अग्रणी है। Samsung और LG जैसी कंपनियाँ इस निवेश का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।
United States of America
अमेरिका अपनी GDP का लगभग 3.5% विज्ञान और तकनीक पर खर्च करता है।
परिणाम: Silicon Valley, अंतरिक्ष अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में वैश्विक प्रभुत्व। दुनिया की अधिकांश बड़ी टेक कंपनियाँ अमेरिका से निकलती हैं।
Japan:
जापान GDP का 3.3% रिसर्च पर निवेश करता है।
परिणाम: रोबोटिक्स, ऑटोमोबाइल और हाई-प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग में जापान की विश्वसनीयता इसकी मजबूत रिसर्च संस्कृति का प्रमाण है।
China
चीन अपनी GDP का लगभग 2.6% R&D पर खर्च करता है और यह आंकड़ा तेज़ी से बढ़ रहा है।
परिणाम: AI, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष तकनीक में चीन तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पेटेंट फाइलिंग में वह आज दुनिया में अग्रणी है।
भारत की स्थिति: अपार क्षमता, सीमित निवेश
India
भारत GDP का लगभग 0.7% ही रिसर्च और डेवलपमेंट पर खर्च करता है।
परिणाम: देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, लेकिन मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम के अभाव में भारत आज भी तकनीक का बड़ा उपभोक्ता है। पेटेंट, डीप-टेक इनोवेशन और मूल वैज्ञानिक खोजों में भारत पीछे है।
R&D निवेश के प्रत्यक्ष लाभ
नई तकनीकों का जन्म
वैश्विक कंपनियों और स्टार्ट-अप्स का निर्माण
आर्थिक और सैन्य आत्मनिर्भरता
उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार
ब्रेन-ड्रेन की जगह ब्रेन-गेन
निष्कर्ष
इतिहास गवाह है कि जो देश अपनी प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों में निवेश करता है, वही भविष्य का नेतृत्व करता है।
R&D पर खर्च कोई खर्च नहीं, बल्कि राष्ट्र के कल में किया गया निवेश है।
अगर भारत को 21वीं सदी की वैश्विक शक्ति बनना है, तो उसे केवल जनसंख्या या बाज़ार के भरोसे नहीं, बल्कि विज्ञान, रिसर्च और इनोवेशन के रास्ते आगे बढ़ना होगा।
👉 राष्ट्र का भविष्य प्रयोगशालाओं (labs), विश्वविद्यालयों और रिसर्च सेंटरों में तय होता है—सिर्फ भाषणों में नहीं।
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MANOJ ADHYAYI, Sr AI PROJECT MANAGER
