प्यार की खोज करने वाले वैज्ञानिक एवं वेलेंटाइन दिवस

संत वैलेंटाइन की शहादत: प्रचलित कथा के अनुसार, रोम के सम्राट क्लॉडियस द्वितीय ने सैनिकों के विवाह पर प्रतिबंध लगा दिया था। पादरी वैलेंटाइन ने इसका विरोध किया और गुप्त रूप से जोड़ों का विवाह कराया। इसके लिए उन्हें 14 फरवरी, लगभग 270 ईस्वी में फांसी दे दी गई।

लूपरकेलिया उत्सव: कुछ इतिहासकारों का मानना है कि चर्च ने फरवरी के मध्य में होने वाले ‘लूपरकेलिया’ (रोमन प्रजनन उत्सव) को बदलने के लिए संत वैलेंटाइन डे को मान्यता दी।

रोमांटिक संबंध: 14वीं शताब्दी में, कवि जियोफ्री चौसर ने अपनी कविताओं में वैलेंटाइन डे को प्रेम और पक्षियों के प्रजनन से जोड़ा, जिससे यह दिन रोमांटिक प्रेम का प्रतीक बन गया।

नाम का उत्पत्ति: माना जाता है कि फांसी पर चढ़ने से पहले, वैलेंटाइन ने जेलर की बेटी को एक प्रेम पत्र भेजा था, जिसके अंत में “फ्रॉम योर वैलेंटाइन” लिखा था।

आधुनिक स्वरूप: 19वीं सदी से यह दिन कार्ड और तोहफों के आदान-प्रदान के साथ व्यापक रूप से मनाया जाने लगा।

आधुनिक प्रेस:- आधुनिक मानव प्रेम अब मोबाइल के माध्यम से शुरू हो गया है, अब विज्ञान तकनीक प्रेम संबंध को अधिक मजबूत बना दिया है, फोन पर बातचीत और लोकेशन का आदान प्रदान।

प्यार की खोज करने वाले कोई एक वैज्ञानिक नहीं हैं, बल्कि कई वैज्ञानिकों और मानवशास्त्रियों ने प्यार के विज्ञान को समझने में योगदान दिया है, जिनमें डॉ. हेलेन फिशर (मानवविज्ञानी), एलेन हैटफील्ड और एलेन बरशेड (सामाजिक मनोवैज्ञानिक) प्रमुख हैं, जिन्होंने प्यार को वासना, आकर्षण और लगाव के चरणों में बांटा और इसके रासायनिक व मस्तिष्क के पहलुओं (जैसे डोपामाइन, ऑक्सीटोसिन) को उजागर किया, जिससे पता चला कि प्यार एक जटिल जैविक और मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है.

प्रमुख वैज्ञानिक और उनके योगदान:

1.डॉ. हेलेन फिशर (Helen Fisher): इन्हें प्यार के विज्ञान में अग्रणी माना जाता है. इन्होंने fMRI स्कैन का उपयोग करके दिखाया कि प्यार में पड़ने पर मस्तिष्क के इनाम केंद्र (reward centers) सक्रिय होते हैं, जो भोजन और पानी की तलाश करने वाले मस्तिष्क के हिस्से जैसे होते हैं. उन्होंने प्यार को तीन चरणों (वासना, आकर्षण, लगाव) में बांटा और बताया कि इसमें डोपामाइन, एड्रेनालाईन, नॉरएपिनेफ्रिन और ऑक्सीटोसिन जैसे रसायन शामिल होते हैं.

2.एलेन हैटफील्ड (Ellen Hatfield) और एलेन बरशेड (Ellen Berscheid): 1970 के दशक में इन्होंने “भावुक प्रेम” (passionate love) और “साथी प्रेम” (companionate love) को परिभाषित किया. इन्होंने “भावुक प्रेम” मापने के लिए एक पैमाना (scale) भी विकसित किया.

3.जॉन बॉल्बी (John Bowlby) और जीन पियाजे (Jean Piaget): इन्होंने लगाव (attachment) और संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) के सिद्धांतों के माध्यम से प्यार और रिश्तों की नींव रखने में मदद की.

4.गॉटमैन (Gottman): इन्होंने भावनात्मक बुद्धिमत्ता (EQ) और सहानुभूति (empathy) को लंबे समय तक चलने वाले रिश्तों के लिए महत्वपूर्ण पाया, और दिखाया कि कैसे लोग रिश्तों में एक-दूसरे को समझते हैं.

प्यार के बारे में मुख्य वैज्ञानिक निष्कर्ष:

तीन चरण: वासना (हार्मोनल), आकर्षण (डोपामाइन, एड्रेनालाईन), और लगाव (ऑक्सीटोसिन).

मस्तिष्क की भूमिका: प्यार में पड़ने पर डोपामाइन (खुशी) और ऑक्सीटोसिन (जुड़ाव) जैसे न्यूरोट्रांसमीटर सक्रिय होते हैं, जो नशे जैसा अनुभव दे सकते हैं.

जैविक आधार: प्यार सिर्फ एक भावना नहीं, बल्कि एक जैविक प्रक्रिया है, जो जीवित रहने और प्रजनन के लिए विकसित हुई है.

संक्षेप में, प्यार की खोज किसी एक व्यक्ति ने नहीं की, बल्कि कई वैज्ञानिकों ने इसे समझने के लिए काम किया है, जिनमें डॉ. हेलेन फिशर सबसे प्रमुख हैं, जिन्होंने प्यार के रासायनिक और न्यूरोलॉजिकल पहलुओं को उजागर किया है

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प्यार और इश्क मुख्य रूप से मस्तिष्क में डोपामाइन (खुशी), ऑक्सीटोसिन (जुड़ाव), सेरोटोनिन (मूड) और नॉरएपिनेफ्रीन (रोमांच) जैसे रसायनों (हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर) के एक साथ मिलकर काम करने के कारण होता है, जो आनंद, उत्साह, जुड़ाव और प्यार की भावनाओं को जन्म देते हैं, जिससे यह एक नशे जैसी अनुभूति भी हो सकती है.

मुख्य रसायन और उनके कार्य:

1. डोपामाइन: इसे ‘फील-गुड’ रसायन कहते हैं, जो खुशी और इनाम (reward) की भावना देता है, जिससे आप उस व्यक्ति के साथ रहने के लिए प्रेरित होते हैं.

2.ऑक्सीटोसिन: इसे ‘कडल’ या ‘लव हार्मोन’ कहते हैं, जो सामाजिक जुड़ाव, विश्वास और लगाव की भावना पैदा करता है, खासकर शारीरिक अंतरंगता के दौरान.

3.सेरोटोनिन: यह मूड को नियंत्रित करता है, और शुरुआती प्यार के दौरान इसके स्तर में गिरावट उत्साह और जुनून को बढ़ा सकती है.

4.नॉरएपिनेफ्रीन (एड्रेनालाईन): यह उत्तेजना और ऊर्जा बढ़ाता है, जिससे दिल की धड़कन तेज होती है, हाथ-पैर पसीने से तर होते हैं और गाल लाल हो जाते हैं (जैसे कि पहली मुलाकात में होता है).

5.फेनिलएथाइलामाइन (PEA): यह डोपामाइन और नॉरएपिनेफ्रीन के स्तर को बढ़ाकर “प्यार का अणु” कहलाता है, जो उत्साह और ऊर्जा देता है.

प्यार के चरणों के अनुसार रसायन:

1.वासना (Lust): टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन से प्रेरित.

2.आकर्षण (Attraction): डोपामाइन, नॉरएपिनेफ्रीन और PEA का स्राव, जिससे उत्साह और जुनून महसूस होता है.

3.लगाव (Attachment): ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन का स्राव, जो दीर्घकालिक बंधन और गहरे जुड़ाव को बढ़ाता है ।

डाॅ हेलेन फिशर मानवविज्ञान के अनुसार प्यार करने का सही शुरुआती उम्र 35 -50 वर्ष तक हीं मजबूत होता है ,इस उम्र के पुरूषों में मानसिक, शारीरिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक से समझौता करने की समझ एवं शक्ति होती है, ऐसे लोगों से मजबूत एवं तन्दुरूस्त, उच्च मष्तिष्क के संतान उत्पन्न होते हैं, मानसिक स्वास्थ्य एवं शारीरिक स्वास्थ्य के लिए पुरूषों की सही उम्र है। महिलाओ में 21- 30 तक हीं डोपामाइन रसायनिक जैविक तरल तत्व सक्रिय रहते हैं, जबकी पृरूषों में आजीवन सक्रिय रहता है।

वैलेंटाइन डे लिस्ट में 7 फरवरी से शुरू होकर 14 फरवरी तक चलने वाला ‘वैलेंटाइन वीक’ शामिल है.

जिसमें रोज़ डे (7 Feb), प्रपोज़ डे (8 Feb), चॉकलेट डे (9 Feb), टेडी डे (10 Feb), प्रॉमिस डे (11 Feb), हग डे (12 Feb), और किस डे (13 Feb) होते हैं,

जिसके बाद 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है, जो प्यार और रिश्तों का जश्न मनाने के लिए सात दिनों का उत्सव है।

वैलेंटाइन वीक की पूरी लिस्ट:

7 फरवरी: रोज़ डे (Rose Day) – प्यार का इजहार गुलाब देकर किया जाता है।

8 फरवरी: प्रपोज़ डे (Propose Day) – अपने प्यार का प्रस्ताव रखने का दिन।

9 फरवरी: चॉकलेट डे (Chocolate Day) – चॉकलेट बांटकर प्यार का स्वाद बांटा जाता है।

10 फरवरी: टेडी डे (Teddy Day) – टेडी बियर देकर स्नेह व्यक्त किया जाता है।

11 फरवरी: प्रॉमिस डे (Promise Day) – रिश्ते में वादे किए जाते हैं।

12 फरवरी: हग डे (Hug Day) – गले लगाकर प्यार जताते हैं।

13 फरवरी: किस डे (Kiss Day) – प्यार का इजहार चुंबन से करते हैं।

14 फरवरी: वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day) – प्यार और रोमांस का मुख्य दिन।

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प्यार महा+आनंद प्रकृति और सृष्टि चक्र

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प्यार और सृष्टि चक्र गहरे आध्यात्मिक और दार्शनिक संबंध रखते हैं, जहाँ प्यार (अनाहत चक्र) सृष्टि की मूल ऊर्जा है जो करुणा, सेवा और सकारात्मकता से जुड़ी है, जबकि सृष्टि चक्र (जन्म-मृत्यु-पुनर्जन्म) ब्रह्मांड के निरंतर चलने वाले नित्य क्रम को दर्शाता है, जिसमें हर आत्मा एक भूमिका निभाती है । प्रेम के माध्यम से ही व्यक्ति स्वार्थ से ऊपर उठकर सृष्टि के इस नाटक में सकारात्मक योगदान देकर परमानंद और संतुलन प्राप्त करता है, जो जीवन के हर पहलू को प्रभावित करता है।

प्यार (प्रेम) का अर्थ:

ऊर्जा का स्रोत: सच्चा प्यार सार्वभौमिक जीवन ऊर्जा है, जो हर चक्र (ऊर्जा केंद्र) में परमानंद का अनुभव कराता है।

हृदय चक्र (अनाहत): यह प्रेम, करुणा और क्षमा का केंद्र है, जो दूसरों को देने और स्वीकार करने की प्रेरणा देता है।

आंतरिक और बाहरी: यह आत्मा से परमात्मा से जुड़ने से सहज रूप से मिलता है, जिससे बाहरी अपेक्षाएं खत्म होती हैं।

सृष्टि चक्र का अर्थ:

निरंतर प्रवाह: यह सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग जैसे विभिन्न युगों में घूमने वाला एक अंतहीन चक्र है, जिसमें न कोई शुरुआत है न अंत।

आत्माओं का नाटक: यह आत्माओं और प्रकृति का एक अद्भुत नाटक है, जहाँ हर 5000 साल में हर आत्मा शरीर धारण कर अपनी भूमिका निभाती है।

कर्म और सेवा: इस चक्र में सेवा (पशु-पक्षियों, गरीबों, पर्यावरण की) स्वार्थ से ऊपर उठने और संतुष्टि पाने का अवसर देती है।

प्यार और सृष्टि का संबंध:

सृष्टि का आधार: ईश्वर के स्वभाव में प्रेम है, इसलिए सृष्टि का निर्माण प्रेम से ही होता है।

सकारात्मक चक्र: जब व्यक्ति प्रेम, करुणा और सेवा के मार्ग पर चलता है, तो वह सृष्टि चक्र को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जिससे भावनात्मक संतुलन और आध्यात्मिक विकास होता है।

परमात्मा का कर्तव्य: सृष्टि के प्राणियों के प्रति प्रेम और मार्गदर्शन (जैसे जगदंबा का वात्सल्य) सृष्टि के संचालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

संक्षेप में, प्रेम वह शक्ति है जो सृष्टि चक्र को अर्थ देती है और उसे सकारात्मक दिशा में ले जाती है, जबकि सृष्टि चक्र वह मंच है जिस पर प्रेम की यह यात्रा निरंतर चलती रहती है।

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DR.BASUDEO KUMAR SHARMA

PRIME EDITOR (SCIENTIST)

VIGYANMEV JAYATE

N.H.E.M.S.MAGAZINE OF INDIA, RNI. GOVT.OF.INDIA

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