पूर्वी चम्पारण के पुलिसिया आरण्य में सिंघम एसपी श्री स्वर्ण प्रभात की दहाङ से पुलिस महकमें थरथराया
1. मोतिहारी में फर्जी पुलिस मित्र के बहाली में महाठगी का खुलासा!
2. पुलिस मित्र’ बहाली के नाम पर 41 बेरोजगारों से लाखों की ठगी
3. SP ने बनाई SIT, कई थानेदारों की भूमिका जांच के घेरे में
MOTIHARI (पूर्वी चंपारण बिहार) पूर्वी चंपारण जिले में ‘पुलिस मित्र’ बहाली के नाम पर एक बड़े फर्जीवाड़े और संगठित ठगी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। एक फर्जी एनजीओ ने सरकारी नौकरी और ₹20,000 मासिक वेतन का झांसा देकर 41 बेरोजगार युवकों से लाखों रुपये ऐंठ लिए। मामला सामने आते ही जिले के एसपी स्वर्ण प्रभात ने कड़ा रुख अपनाते हुए कोटवा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी गई है।
🕵️♂️ प्रशिक्षु IPS की अगुवाई में SIT गठित
ठगी की गंभीरता और संभावित पुलिस-शह को देखते हुए एसपी ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसकी कमान एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी को सौंपी गई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जांच की आंच अब जिले के कई थानों के थानेदारों तक पहुंच गई है। आरोप है कि कुछ थानों में स्टेशन डायरी (सनहा) में नाम दर्ज कर युवकों की फर्जी ज्वाइनिंग दिखाई गई, जिससे पूरा खेल “सरकारी” लगने लगा।
🏫 मुजफ्फरपुर में ट्रेनिंग, थानों में ID कार्ड का वितरण
जालसाजों ने ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए युवकों को पहले मुजफ्फरपुर ले जाकर ट्रेनिंग दिलवाई। इसके बाद थाना परिसरों में ही ID कार्ड बांटे गए, ताकि किसी को शक न हो। सूत्रों के मुताबिक कल्याणपुर, केसरिया, चकिया, मेहसी, अरेराज, फेनहारा, ढाका, चिरैया और घोड़ासहन जैसे कई थानों में इन फर्जी पुलिस मित्रों की तैनाती दिखाई गई। हैरानी की बात यह है कि चौकीदारों और दफादारों के बेटों तक को इस जाल में फंसाकर उनसे भी मोटी रकम वसूली गई।
💸 50 हजार से 1 लाख तक की वसूली
🕵🏻पुलिस मित्र के माध्यम से FIR करने तथा आवेदन पत्र लिखने पर परिवादियों/ प्रार्थियों से कम से कम 1000 रुपए की वसूली एवं जघन्य धारा लागू हो ऐसा कहानी बनाया जाता रहा ।
🕵🏻♀️समाज में पुलिस के प्रति अविश्वास चरम पर, पुलिस अपना सम्मान अपने खो रही, पुलिस के लिए बहुत हीं शर्मनाक बात।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अब तक 41 युवकों से ठगी की पुष्टि
प्रति युवक ₹50,000 से ₹1,00,000 तक की वसूली डिजिटल पेमेंट (फोन-पे/ऑनलाइन ट्रांजेक्शन) के ज़रिए पैसा लिया गया
अब पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिससे ठगों की पूरी चेन बेनकाब होने की उम्मीद है।
🕵🏻पुलिस के बिना मिलीभगत से, इतना बड़ा खेल संभव नहीं!
स्थानीय लोगों का कहना है कि थाना परिसरों के इस्तेमाल और सनहा एंट्री के बिना इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव ही नहीं है। यही वजह है कि इस मामले ने पूरे जिला पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
🔥 SP का सख्त संदेश
एसपी स्वर्ण प्रभात ने साफ कहा है—
“पीड़ित युवकों के आवेदन पर केस दर्ज कर लिया गया है। फर्जी एनजीओ संचालकों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी चल रही है।
यदि किसी भी थानेदार या पुलिसकर्मी की भूमिका संदिग्ध पाई गई, तो उनके खिलाफ कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई होगी। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।”
(डाॅ बासुदेव कुमार शर्मा)
प्रधान संपादक ( वैज्ञानिक)
विज्ञानमेव जयते RNI. भारत सरकार
