विज्ञान से ही भारत आत्मनिर्भर बन सकता है
भारत की आत्मनिर्भरता का विचार कोई नया नहीं है, किंतु 21वीं सदी में इसका मार्ग स्पष्ट रूप से विज्ञान, तकनीक और नवाचार से होकर गुजरता है। इतिहास साक्षी है कि जिन राष्ट्रों ने विज्ञान को अपने विकास का आधार बनाया, वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बने, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में भी आए। आज भारत उसी निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ विज्ञान उसे आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की क्षमता रखता है।
आत्मनिर्भरता और विज्ञान का अटूट संबंध
आत्मनिर्भर भारत का अर्थ केवल आयात कम करना नहीं, बल्कि स्वदेशी ज्ञान, अनुसंधान और उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करना है। कृषि से लेकर रक्षा, स्वास्थ्य से लेकर अंतरिक्ष, और शिक्षा से लेकर उद्योग तक—हर क्षेत्र में विज्ञान ने भारत की दिशा और दशा बदली है।
हरित क्रांति इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक कृषि तकनीकों ने भारत को खाद्यान्न संकट से निकालकर खाद्य सुरक्षा वाला राष्ट्र बनाया। इसी प्रकार, श्वेत क्रांति ने दुग्ध उत्पादन में भारत को विश्व में अग्रणी बनाया।
स्वास्थ्य और विज्ञान: आत्मनिर्भरता की नई पहचान
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने यह सिद्ध किया कि विज्ञान में निवेश राष्ट्र को संकट के समय आत्मनिर्भर बनाता है। स्वदेशी वैक्सीन विकास, बड़े पैमाने पर उत्पादन और वैश्विक आपूर्ति ने भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में स्थापित किया। यह आत्मनिर्भर वैज्ञानिक क्षमता का जीवंत प्रमाण है।
अंतरिक्ष और रक्षा: विज्ञान की वैश्विक पहचान
ISRO की उपलब्धियाँ—चंद्रयान, मंगलयान और गगनयान—यह दर्शाती हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद वैज्ञानिक दृष्टि भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठा दिला सकती है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी मिसाइलें, रडार और आधुनिक तकनीकें भारत की रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रही हैं।
डिजिटल भारत और तकनीकी क्रांति
डिजिटल इंडिया, यूपीआई, आधार, स्टार्टअप इंडिया—ये सभी विज्ञान और तकनीक पर आधारित पहलें हैं। आज भारत का डिजिटल ढांचा न केवल देश की अर्थव्यवस्था को गति दे रहा है, बल्कि आम नागरिक को सशक्त बना रहा है। यह ज्ञान-आधारित आत्मनिर्भरता का नया मॉडल है।
विज्ञान शिक्षा: भविष्य की कुंजी
यदि भारत को दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनना है, तो वैज्ञानिक सोच को जन-आंदोलन बनाना होगा। गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों को समर्थन और युवाओं में नवाचार की संस्कृति—यही आत्मनिर्भर भारत की नींव है।
आत्मनिर्भर भारत कोई नारा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टि से संचालित राष्ट्रीय लक्ष्य है। जब विज्ञान नीति, शिक्षा, उद्योग और समाज का अभिन्न अंग बनता है, तब राष्ट्र आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वासी भी बनता है।
निस्संदेह, विज्ञान से ही भारत आत्मनिर्भर बन सकता है।
[M K Sr AI PROJECT MANAGER]
