कैसी होगी मानव की AI दुनिया

मानव की आधुनिक सांस्कृतिक विरासत एवं प्रजनन व्यापार पर भविष्यवाणी

मानव सभ्यता अपने इतिहास के सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल तकनीक, जैव-विज्ञान और वैश्विक पूँजीवाद के संयुक्त प्रभाव ने न केवल मनुष्य की जीवनशैली बदली है, बल्कि उसकी संस्कृति, रिश्तों, नैतिकता और सृष्टि-प्रक्रिया तक को गहरे संकट में डाल दिया है। प्रश्न केवल यह नहीं है कि तकनीक कितनी उन्नत होगी, बल्कि यह है कि उस तकनीक के बीच मानव कितना मानवीय बच पाएगा।

तकनीक और मानव का नया संलयन

भविष्य की दुनिया में AI केवल एक उपकरण नहीं रहेगा, बल्कि वह मानव के सोचने, निर्णय लेने और संबंध बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा बन जाएगा। सूचना का प्रवाह तात्कालिक होगा, लेकिन संवेदना और विवेक का ह्रास दिखाई देगा। आभासी वास्तविकता (VR), संवर्धित वास्तविकता (AR) और डिजिटल प्लेटफॉर्म मानव जीवन को इस कदर घेर लेंगे कि भौतिक और आभासी संसार के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो जाएगा।

बदलती सामाजिक और पारिवारिक संरचना

संयुक्त परिवारों का स्थान परमाणु परिवार लेंगे और पारिवारिक अनुशासन, शिष्टाचार तथा पारंपरिक मूल्य कमजोर पड़ेंगे। विवाह संस्था भावनात्मक बंधन के बजाय सुविधा और समझौते का रूप ले सकती है। प्रेम, संबंध और साथ रहने की अवधारणा अस्थायी होती जाएगी। माता-पिता, भाई-बहन और पति-पत्नी के रिश्तों में उत्तरदायित्व की भावना कम होती दिखेगी।

भोगवाद बनाम आध्यात्मिकता

आधुनिक संस्कृति का केंद्र बिंदु ‘भोग’ बनता जा रहा है। शाश्वत सुख, आत्मिक शांति और परम सत्य की खोज के स्थान पर तात्कालिक सुख और शारीरिक संतुष्टि को प्राथमिकता दी जा रही है। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर नैतिकता और जीवन-मूल्यों की नई परिभाषाएँ गढ़ी जाएँगी, जिनमें आत्मसंयम की जगह उपभोग प्रमुख होगा।

पहचान का संकट और सांस्कृतिक अलगाव

वैश्विक संस्कृति के तीव्र प्रभाव में स्थानीय परंपराएँ, भाषाएँ और सांस्कृतिक जड़ें कमजोर होंगी। नई पीढ़ी अपनी विरासत से कटती जाएगी, जिससे पहचान का गहरा संकट उत्पन्न होगा। व्यक्ति वैश्विक तो होगा, परंतु जड़ों से विहीन।

मानव-पर्यावरण संबंध और दिखावटी स्थिरता

पर्यावरण संरक्षण की बातें होंगी, हरित तकनीक और इलेक्ट्रिक युग का प्रचार होगा, लेकिन उपभोग की असीमित भूख के कारण प्रकृति पर दबाव बना रहेगा। विज्ञान समाधान प्रस्तुत करेगा, परंतु समाज विज्ञान को प्राथमिकता देने के बजाय सुविधा को चुनेगा।

2050 से 2150 : एक चेतावनीपूर्ण भविष्य

आने वाले समय में मानव सृष्टिवाद पर गहरा संकट दिखाई देता है। प्रजनन एक प्राकृतिक प्रक्रिया न रहकर व्यापार बन सकता है। किराये पर बच्चे पैदा करने की अवधारणा, कृत्रिम गर्भ, और यांत्रिक शिशु वास्तविकता बन सकते हैं। रोबोट और AI मानवीय संबंधों का स्थान लेने लगेंगे।

शारीरिक और मानसिक संबंधों की स्वतंत्रता अराजकता में बदल सकती है। शिक्षा का केंद्र मानसिक विकास के बजाय केवल शारीरिक विषयों तक सिमट सकता है। अवैध संतानों की संख्या बढ़ेगी और समाज संवेदनहीन होता जाएगा।

सत्ता, मुद्रा और अराजकता

मुद्रा सर्वोच्च शक्ति बन जाएगी। सामाजिक और राजनीतिक तंत्र अराजकता पर टिके होंगे। अपराधी व्यवस्था के संरक्षक बन सकते हैं और सामान्य नागरिक मूकदर्शक। धार्मिक केंद्र बड़े राजनीतिक-आर्थिक व्यवसायिक केंद्रों में परिवर्तित हो सकते हैं।

निष्कर्ष

AI युग मानव को अभूतपूर्व सुविधा, शक्ति और गति देगा, लेकिन यदि नैतिकता, विवेक और सांस्कृतिक चेतना को साथ नहीं रखा गया, तो मानव जीवन डिस्पोजेबल वस्तु बनकर रह जाएगा। यह लेख कोई भय फैलाने का प्रयास नहीं, बल्कि चेतावनी और आत्ममंथन का निमंत्रण है।

भविष्य हमारे हाथ में है—प्रश्न केवल इतना है कि हम तकनीक के स्वामी बनेंगे या उसके दास।

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डॉ. बासुदेव कुमार शर्मा

भौतिक विज्ञानी | प्रधान संपादक – विज्ञानमेव जयते

(भारत सरकार)

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